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गुलाबी ऑटो चलाकर महिलाएं बनीं स्वावलंबी

रांची। संवाददाता। कभी गरीबी से जूझ रही महिलाएं अब राजधानी की सड़कों पर गुलाबी ऑटो ( महिलाओं के लिए )चला कर खुशहाल हैं। अपने परिवार और घर-गृहस्थी चलाने से परेशान इन मजदूर महिलाओं ने पुरुषों के वर्चस्व वाले व्यवसाय में दखल देकर परचम लहराया है। पहले महज सौ-डेढ़ सौ रुपये की मजदूरी करने वाली ये महिलाएं अब गुलाबी ऑटो की मालकिन बन चुकी हैं। एक दिन की औसतन कमाई तीन से चार सौ रुपए है। घर-परिवार खुशहाल है। सात गुलाबी ऑटो राजधानी की विभिन्न सड़कों पर दौड़ रही हैं।

प्रशासन ने महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की दिशा में योगदान दिया। पिछले 16 फरवरी को इन गुलाबी ऑटो को यातायात एसपी ने हरी झंडी दिखायी थी। पहले मजदूरी कर किसी तरह जीवन-यापन करनेवाली इन ऑटो चालकों के अनुसार अपने नए पेशे से वह खुश हैं। पहले उन्हें रेजा का काम भी कभी-कभार ही मिलते थे। घर में फांकाकसी हो जाती थी। ऑटो महासंघ की ओर से महिला ऑटो चालक का प्रस्ताव मिला। राजमणि प्रोपर्टी प्रा लिमिटेड की ओर से उन्हें ऑटो चालक का प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग दिया गया।

उनके साथ 12 महिलाओं ने गुलाबी ऑटो चालकों का प्रशिक्षण लिया है। घर में पति भी है। वह भी कमाते हैं। अब आर्थिक तंगहाली नहीं है। सड़कों में शुरुआत हुई, लेकिन बाद में प्रशासन के सहयोग से सब कुछ ठीक हो गया। गुलाबी ऑटो चालकों का नेतृत्व करनेवाली आरती बेहरा के अनुसार अभी सुकुरमनी, मंजू, सुनीता, बिरेश, प्रतिमा, पिंकी और हीरा देवी गुलाबी ऑटो चला रही हैं। कुल 50 महिलाओं ने ऑटो का प्रशिक्षण लिया है।

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  • Web Title:गुलाबी ऑटो चलाकर महिलाएं बनीं स्वावलंबी