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महिला दिवसः महिलाओं ने हासिल किया अपना मानवीय हक

आठ मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का महिला मुक्ति आंदोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। यह दिवस समस्त विश्व की महिलाओं की एकता, अस्मिता और स्वतंत्रता के संघर्ष का प्रतीक है। दुनिया के कोने-कोने में महिलाओं ने अपने मानवीय हक हासिल करने के लिए एकजुट लड़ाई की शुरुआत इसी दिन से की है। 8 मार्च 1857 के दिन अमेरिका के सूती कपड़ा उद्योगों में काम करनेवाली महिला श्रमिकों ने काम के घंटे 16 से 10 करने के लिए सर्वप्रथम आंदोलन की शुरुआत की।

आठ मार्च 1883 में महिलाओं को अपने लंबे आन्दोलन के फलस्वरूप सर्वप्रथम मताधिकार हासिल हुए और 1910 में समाजवादी औरतों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में नारी मुक्ति आन्दोलन की महान नेत्री ‘क्लारा जेटकिन’ के प्रस्ताव पर 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। 8 मार्च 1915 में ओस्लो में महिलाओं ने एकजुट होकर, विश्वयुद्घ का विरोध किया। 8 मार्च 1917 को रूस में रोटी और शांति के नारे के साथ महिलाओं ने अक्टूबर क्रांति की अगुवाई की।

8 मार्च 1937 में स्पेन की महिलाओं ने फ्रेंको की तानाशाही के खिलाफ प्रदर्शन किया। 8 मार्च 1943 में इटालियन महिलाओं ने मुसोलनी की तानाशाही का विरोध किया। 8 मार्च 1974 में वियतनामी महिलाओं ने अमेरिकी साम्राज्यवाद के खिलाफ आवाज उठाई। 8 मार्च 1975 से 8 मार्च 1985 को ‘अंतरराष्ट्रीय महिला दशक’ घोषित कर पूरे विश्व के साथ भारतवर्ष में भी महिला आंदोलन की दिशा निर्धारित की गई।

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