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इस बार जनता से मनमाने वादे नहीं चलेंगे

पटना। हिन्दुस्तान ब्यूरो। विभिन्न राजनीतिक दल इस बार अपने घोषणा पत्र में मतदाताओं से मनमाने वादे नहीं करेंगे। इसके अलावा राजनीतिक दल और उनके प्रत्याशी मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए गलत तरीके नहीं अपनाएं, इसके लिए चुनाव आयोग ने कमर कस ली है।

घोषणा पत्र पर नजर रखने के साथ-साथ चुनाव आयोग निर्वाचन कार्य में लगे अधिकारियों को नेताओं की सभाओं में भी भेजेगा,जिंससे वहां उनकी गतिविधियों और दावों-वादों की जानकारी मिल सके।

क्या करना होगाः सभी राजनीतिक दल अपने घोषणा पत्र को जनता के बीच जारी करने से पहले चुनाव आयोग को भेजेंगे। इस घोषणा पत्र में जनता से किए जाने वाले वादे को शामिल करने के साथ-साथ, उनके तार्किक औचित्य, उसका क्रियान्वयन कैसे किया जाएगा और उस वादे को पूरा करने के लिए धन कहां से जुटाया जाएगा, इसका उल्लेख भी करना होगा।

इसलिए हुआ बदलावः मतदाताओं से मनमाने वादे कर कई राष्ट्रीय राजनीतिक दल और बड़े क्षेत्रीय दल सत्ता में आ जाते हैं। इससे कई बार निर्दलीय प्रत्याशी और छोटे दलों को नुकसान होता है और सत्ता में आने की उनकी संभावनाएं नहीं के बराबर रह जाती है।

पिछले साल जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई में मनमाने वाले को अनुचित माना और निर्वाचन आयोग को घोषणा पत्र के संबंध में दिशा-निर्देश तैयार करने को कहा, जिसके बाद यह पहल हुई है।

इस संबंध में चुनाव आयोग ने गत 7 फरवरी को विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक भी की।

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