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डॉक्टरों की हड़ताल जायज या नाजायज विवाद

बहराइच। हिन्दुस्तान संवाद।  पिछले दिनों कानपुर के एक अस्पताल में हुई घटना के बाद डॉक्टरों ने जिस प्रकार प्रदेश व्यापी हड़ताल की उससे आम जनमानस हिल उठा। हड़ताल के दौरान हो रही मौतों से धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर नहीं पसीजे। सवाल यह है कि मेडिकल की डिग्री हासिल करने के दौरान जीवन बचाने का संकल्प लेने वाले डॉक्टर आखिर इतने क्रूर कैसे हो गए कि उनके सामने रोगी दम तोड़ते रहे और वे टस से मस तक नहीं हुए।

डॉक्टरों की इस बदलती मानसिकता पर हिन्दुस्तान ने जिले के कुछ मानिन्द लोगों की राय जानने की कोशशि की तो कई अनछुए पहलू उभरकर सामने आए। प्रस्तुत है इस संवेदनशील मसले पर जिले के खास लोगों की राय।

बेवजह हड़ताल पर लगे पाबंदी बेवजह हड़तालों पर पाबंदी लगानी चाहिए। साथ ही शासन प्रशासन को हड़ताल के लिए मजबूर लोगों की भावनाओं को समझना चाहिए। दोषियों पर त्वारित कार्रवाई से परहेज नही करना चाहिए। सभा राज सिंह एडवोकेट सिविल कोर्ट फोटो नम्बर: 09 गलत नीतियां जिम्मेदार प्रदेश में सबसे ज्याद डाक्टर प्रताडिम्त हैं।

शासन की गलत नीतियां इसके लिए जिम्मेदार है। समय रहते कदम नही उठाएं गए तो इसका असर ऐसे युवा वर्ग पर पड़ेगा, जो डॉक्टर बन रहे हैं। मेजर डॉ. एसपी सिंह कार्यवाहक प्राचार्य केडीसी

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