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सत्य परेशान होता है पराजित नही: स्वामी नारायणानंद

लालगंज। हिन्दुस्तान संवाद। क्षेत्र के गंगहरा कला गांव में चल रहे सात दिवसीय सहस्त्रचंडी महायज्ञ के तीसरे दिन शुक्रवार को स्वामी नारायणानंद महाराज ने भक्तों को सत्य मार्ग पर चलकर भगवान की भिक्त करने की सीख दी। मानव को कल्याणमयी जीवन के लिए पूजा-पाठ को अिनवार्य बताया। स्वामी ने कहा कि यज्ञ, तप, ये सब क्रियाशीलता का प्रतीक हैं। कहा कि मानव को सत्य वचन बोलने के साथ सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए, क्योंकि सत्य परेशान हो सकता है पराजीत नहीं होता।

स्वामी ने सत्य को सहनशीतला का प्रतीक बताया। कहा कि जहां समाज में सहनशीलता का अभाव होगा उस समाज के व्यिक्त व्यर्थ के परेशान होते हैं। कहा कि प्रितदिन सुबह उठने के पश्चात बिना किसी का चेहरा देखे अपने हथेली में देव दर्शन करना चाहिए और पृथ्वी पर पैर रखने से पहले पृथ्वी माता से क्षमा याचना करनी चाहिए। क्योकि पृथ्वी, भगवान विष्णु की पत्नी हैं। कथा के पश्चात बताया कि पुष्पा देवी, पं. सेवाराम उपाध्याय और कुमारी रुक्मणी कथा वािचका शिनवार से कथा कहेंगी।

कथा में प्रभाशंकर दुबे, कृष्णकुमार दुबे, ित्रलोकनाथ दुबे, राकेश कुमार, रामजतन, शिवबहाल, जीतनारायण दुबे, प्रह्लाद चौबे, जगनारायण, शिरोमिण, प्रभाशंकर, प्रभाकर दुबे, प्रदुम्न कुमार, मंहगीलाल, शिवपूजन, सत्यदेव, श्यामलाल, उमाशंकर िमश्र आदि उपस्थित रहे।

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