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होली की एडवांस पिनक में

आगामी होली के कारण वह अभी से गदगद थे। चुनावी भांग अलग से असर कर रही थी। मैंने पूछ लिया, नेताजी यदि आप चुनाव हार गए, तो क्या करोगे? बोले, देश सेवा करूंगा। मैंने पूछा, मंत्री रहते क्यों नहीं की? बोले, तब टाइम कहां होता है? मैंने टोहा, हार गए, तो किसे दोष देंगे? बोले, पार्टी की नीतियों को। मैं बोला, जीत गए, तो दोषी कौन होगा? बोले, मतदाता होगा और कौन? कहते हैं कि अगर आप अपने बॉस, डॉक्टर, वकील, पत्नी, सरकार और अपने रिश्तेदारों की अनुमति लिए बिना कुछ कर रहे हैं, तो समझिए कि वाकई लोकतंत्र में जी रहे हैं। कोई भी सरकार तभी चल सकती है, जब  उसमें विचार का अभाव हो। हमारे नेता चुनावी दिनों के अलावा हमें कभी मूर्ख नहीं बनाते। एक बार बनाया मूर्ख पांच साल तक चलता है। उसे फिर से ताजा करना पड़ता है। मतदाता अब चतुर हो गए हैं। वे ऐसी सरकार को वोट भले ही दे दें, मगर अपना विश्वास नहीं देते।

मैंने पहले भी कहीं कहा था कि अगर आप अपने देश को प्यार करते हैं, तो शर्तिया अपनी सरकार को पसंद नहीं करते होंगे। यानी आप सरकार से नफरत करते हैं, तो अन्ना हजारे की निगाह में सर्वश्रेष्ठ देशप्रेमी हैं। कहीं मैंने पढ़ा था शायद कि सरकार ऐसी मोटी हथिनी होती है, जो जनता रूपी चिड़िया के नन्हे बच्चों के ऊपर इसलिए बैठी रहती है, ताकि बच्चों को गरमाहट मिलती रहे। अचंभा तो यह है कि हथिनी के इतने बड़े वजन के बावजूद चिड़िया के बच्चे की मेडिकल डेथ नहीं होती। यह अचंभा हथिनी को भी होता है। पाकिस्तान में पिछले दिनों यह खबर बड़ी चर्चा में रही कि पाकिस्तान में भी बोलने की उतनी ही आजादी है, जितनी भारत में। भारत में कोई भी आदमी पार्लियामेंट हाउस के सामने खड़ा होकर भारत सरकार  को गाली दे सकता है। पाकिस्तान भी कम नहीं है। वहां कोई भी चाहे, तो पाकिस्तानी पार्लियामेंट हाउस के सामने खड़ा होकर भारत सरकार को गाली दे सकता है। काश! इस बार  होलिका भ्रष्टाचारी हिरण्यकश्यप को प्रहलाद के वेश में अपनी गोद में लेकर बैठ जाए। सारे मतदाता होलिका दहन करें और फर्जी प्रहलाद भस्म हो जाए।

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