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थोड़ा वक्त दें समस्या को

उस समस्या ने उनको परेशान कर दिया। किस कदर कोशिश कर रहे थे वह। उससे जल्द से जल्द निपट लेना चाहते थे, लेकिन बात नहीं बन रही थी। किसी समस्या को सुलझाने के लिए हम पिल पड़ते हैं, लेकिन ‘कभी-कभी समस्याओं का समाधान कुछ वक्त लेता है। हमें यह समझते हुए अगला कदम उठाना चाहिए।’ यह मानना है डॉ. बार्टन गोल्डस्मिथ का। वह मशहूर साइकोथिरेपिस्ट हैं। इमोशनल सीरीज के तहत उन्होंने कई किताबें लिखी हैं। उनमें बेहद चर्चित है, इमोशनल फिटनेस ऐट वर्क: 6 स्ट्रैटेजिक स्टेप्स टु सक्सेस यूजिंग द पावर ऑफ इमोशन। हमारे सामने कोई समस्या आ खड़ी होती है। तब हमारी पहली प्रतिक्रिया क्या होती है? हम उसे खट से निपटा लेना चाहते हैं। वह समस्या आखिरकार हमारे जेहन पर छाई रहती है। हमें परेशान किए रहती है। जाहिर है, हम परेशान तो होना नहीं चाहते न। सो, उससे जल्द से जल्द निजात पा लेना चाहते हैं। कभी-कभी हमारे सामने कोई ऐसी समस्या आकर खड़ी हो जाती है। हम उससे जल्दी से निपट लेना चाहते हैं।

अपनी तरफ से पूरी कोशिश भी कर लेते हैं। लेकिन समस्या है कि निपटने का नाम ही नहीं लेती। ऐसे में, हमें क्या करना चाहिए? इसी के जवाब में बार्टन का कहना है कि हमें ऐसी समस्या को थोड़ा वक्त दे देना चाहिए। अक्सर ऐसा होता है कि कोई समस्या खट से हल नहीं होती। लेकिन कुछ वक्त के बाद आसानी से हल हो जाती है। ऐसा नहीं है कि यह करते हुए हम उस समस्या से आंखें मूंद लेते हैं। हम समस्या की गंभीरता को भी कम नहीं करते। बस, थोड़ा-सा इंतजार करते हैं। उस बीच में हम उस पर निगाह रखते हैं। उसे हल करने का कोई और रास्ता सूझ जाए, उसकी कोशिश भी करते हैं। फिर वक्त बीतते-बीतते हमें कुछ न कुछ सूझ ही जाता है। कोई न कोई रास्ता निकल ही आता है।

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