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पुतिन चाहते क्या हैं

रूस में एक सरकार है और संसद भी। लेकिन देश के सारे महत्वपूर्ण फैसले सिर्फ एक आदमी लेता है और वह हैं राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन। इस वक्त वही तय करते हैं कि रूस क्या करेगा? रूस की सोच और उनकी योजनाओं को समझने के लिए आपको पुतिन के दिमाग को समझना होगा। तो सवाल यह है कि इस समय पुतिन यूक्रेन के बारे में क्या सोच रहे हैं? पुतिन को यह बात सख्त नापसंद है कि उन्हें धोखा दिया जाए। हमने इसे साल 2011 में लीबिया में देखा था। उस समय रूस को यह समझाने की कोशिश की गई कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव का विरोध न करे, जिसमें नागरिकों के लिए एक उड़ान रहित क्षेत्र बनाने की बात थी। लेकिन नाटो की सैन्य कार्रवाई में तख्तापलट होने के साथ ही कर्नल गद्दाफी की जान भी चली गई।

रूस को इसकी आशंका नहीं थी। लीबिया की घटना इस बात को समझने में मदद कर सकती है कि सीरिया पर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव को रूस ने क्यों रोका। यूक्रेन के मामले में भी पुतिन को लगता है कि पश्चिमी देशों ने उन्हें फंसाया है। पुतिन ने साफ किया है कि वह यूक्रेन के साथ युद्ध नहीं चाहते। उनका कहना है कि रूस ने ‘मानवीय आधार’ पर हस्तक्षेप किया है, ताकि वहां के नागरिकों को ‘अराजकता’ से बचाया जा सके। लेकिन रूस के राष्ट्रीय हित उनकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर हैं। वह यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि नई सरकार पश्चिम को गले लगाने और रूस को ठुकराने से पहले दो बार सोचे।
बीबीसी में स्टीवन रोजनबर्ग

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