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बदायूं। वरष्ठि संवाददाता ‘तेरे माथे पे ये आंचल तो बहुत खूब है लेकिन, तू इसको परचम बना ले तो हो अच्छा। ’ अब तक घर की दहलीज के भीतर अपने वजूद की खातिर जूझने वाली महिलाएं’ अब दहलीज के बाहर मुकाम की तलाश कर रही है। इन महिलाओं ने अपना अलग मुकाम बनाया है। औरत की आजादी की जंग अभी जारी है। इस जंग के कई मायने हैं। कभी उनकी सेहत का सवाल है, कभी सुरक्षा का तो कभी बेरोजगारी के खिलाफ जंग का ऐलान है।gdf

पर शनिवार को महिला राष्ट्रीय दिवस भी है और देश में माहौल लोकसभा चुनाव का है। आओ राजनीति करें अभियान के तहत हिंदुस्तान की चाय चौपाल पर आज महिलाओं का ही दिन था। बेबाक बोलते हुए उन्होंने कहा कि आधी आबादी हमारी है तो हमें भी राजनीति में आना होगा। हर जगह से चुनाव लड़ेंगी तभी देश की सबसे बड़ी पंचायत में भी आधा दबदबा हमारा होगा। महिलाओं ने कहा कि अब वो दिन आ गया कि महिला अत्याचार का सामना नहीं ब्लकि उसको जड़ से उखाड़ने का समय आ गया है।

वोट की चोट लोकतंत्र में इसको उखाड़ सकती है। 15 बार संसद बनी पर महिलाओं की भागीदारी कम रही पर अब हमें देश की इस पंचायत में भागीदारी को बढ़ाना होगा। वोट देंगे और अपने अधिकारों को लेकर रहेंगे। उन्होंने कहा कि महिला के नेतृत्व की सरकारें अच्छी चली है जब महिला घर को चला सकती है तो देश भी अच्छा चलाएगी। उन्होंने कहा कि इस देश में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री रहकर महिलाओं ने दिखा दिया जबकि कई प्रदेशों में मुख्यमंत्री बनकर।

इसके अलावा जब महिला हिमालय की चोटी पर चढ़ सकती है और अंतरिक्ष पर जा सकती है फिर वोट की चोट से देश की सत्ता को भी बदल सकती है।

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  • Web Title:वोट की चोट से बदल देंगे हम तस्वीर