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अर्थव्यवस्था अब पहले से अधिक स्थिर: चिदंबरम

अर्थव्यवस्था अब पहले से अधिक स्थिर: चिदंबरम

वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने घरेलू अर्थव्यवस्था की गुलाबी तस्वीर पेश करते हुये शुक्रवार को कहा कि राजकोषीय और चालू खाते का घाटा काबू में आ चुका है तथा अर्थव्यवस्था 18 महीने पहले के मुकाबले अधिक स्थिर है।

चिदंबरम ने यहां रिजर्व बैंक के केन्द्रीय निदेशक मंडल की बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अर्थव्यवस्था आज 18 महीने पहले के मुकाबले अधिक स्थिर है। यह सब डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती और एफडीआई और एफआईआई दोनों तरह के निवेशकों की बढ़ी रुचि को देखते हुये परिलक्षित हो रहा है।

चिदंबरम ने 18 महीने पहले अगस्त 2012 में वित्त मंत्री का कार्यभार संभाला था। उन्होंने कहा कि 2013-14 के लिये राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल कर लिया जायेगा और चालू खाते का घाटा (कैड) 40 अरब डॉलर से नीचे रहेगा।

उन्होंने कहा कि मुझे यह कहते हुये खुशी है कि रिजर्व बैंक और सरकार द्वारा किये गये उपायों से एक दूसरे को मदद मिल रही है और अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने का जो लक्ष्य हमने 18 महीने पहले रखा था वह पूरा हुआ है।

अर्थव्यवस्था के बारे में बात करते हुये चिदंबरम ने कहा कि भारत को मूल्य स्थिरता और आर्थिक वृद्धि आवश्य हासिल करनी होगी। यही देश के लोग चाहते हैं और वह इसके अधिकारी भी हैं। चिदंबरम ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार और रिजर्व बैंक आपस में मिलकर काम करते हुये इन लक्ष्यों को हासिल कर लेंगे।

सोने के आयात पर लागू प्रतिबंधों में ढील देने के बारे में पूछे गये सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा कि कैड के अंतिम आंकड़े आने के बाद ही वह इस पर विचार करेंगे। बैंक लाइसेंस की सिफारिशों पर चिदंबरम ने कहा कि उन्होंने इस बारे में रिजर्व बैंक को कोई सिफारिश नहीं की है।

चिदंबरम ने कहा कि हमने जालान समिति बनाई है। समिति की रिपोर्ट रिजर्व बैंक के पास है। मैंने इस रिपोर्ट को नहीं देखा है। रिजर्व बैंक इस पर उचित निर्णय लेगा। यदि किसी समय गवर्नर रिपोर्ट के बारे में मुझे कुछ बताते हैं तो उसे सुनने में मुझे खुशी होगी, लेकिन मैं कुछ कहना नहीं चाहता।

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