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10 बातें जो आपको रखें हेल्दी

10 बातें जो आपको रखें हेल्दी

आज विश्व महिला दिवस है। इस मौके पर आप क्यों न उन 10 बीमारियों से बच कर रहें, जो महिलाओं को ज्यादा परेशान करती हैं। आइए जानें उन बीमारियों के बारे में ताकि आप सावधान रहें और बीमारी आपसे दूर रहे।

10 बीमारियां, जिनसे आप बच कर रहें

एनीमिया
खून में रक्तकणों का सामान्य से कम होना एनीमिया कहलाता है। इस बीमारी में रेड ब्लड सेल्स और हीमोग्लोबिन की कमी से शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिसका हमारे शरीर और दिमाग की काम करने की क्षमता पर असर पड़ता है। हमारे देश में 30 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं। शहरों के मुकाबले यह समस्या ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक गंभीर है। यह समस्या महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान अधिक पायी जाती है। एनीमिया के कारण रोगी को थकान, सांस फूलने, ध्यान न केंद्रित कर पाने जैसी समस्या हो सकती है, इसीलिए जरूरी है कि हमारा आहार पौष्टिक हो और आयरन की मात्रा पर्याप्त हो।

दिल की बीमारी
हाल में हुए एक शोध के अनुसार भारतीय महिलाओं की रक्तवाहिनी पुरुषों के मुकाबले अधिक संकरी होती है,  इसलिए महिलाओं में दिल की बीमारी का खतरा ज्यादा होता है। महिलाओं में बढ़ते हृदय रोग का कारण बिगड़ती जीवनशैली, बढ़ता तनाव, खानपान के प्रति लापरवाही है। इससे उनमें उच्च रक्तचाप, बढ़ते कोलेस्ट्रॉल, डाइबिटीज, मेटाबोलिक सिंड्रोम आदि की शिकायत होती है, जो बाद में हार्ट अटैक और अन्य बीमारियों का कारण बन जाती है।

सर्वाइकल कैंसर
यह ऐसी बीमारी है, जो गर्भाशय में कोशिकाओं की अनियमित वृद्धि के कारण होती है। शुरू में अगर सर्वाइकल कैंसर का पता चल जाए तो इससे मुक्ति पाई जा सकती है। ह्यूमन पेपिलोमा वायरस से होने वाला यौन संक्रमण इसका प्रमुख कारण है। शुरुआती अवस्था में सर्वाइकल कैंसर को लक्षणों द्वारा नहीं पहचाना जा सकता, लेकिन यौन से गंध आती हो तो तुरंत डॉंक्टरी परामर्श लेना चाहिए।

ब्रैस्ट कैंसर
जीवन शैली में तेजी से आ रहे परिवर्तन, देर से शादी, देर से बच्चे को जन्म देना, मोटापा और स्तनपान की प्रवृत्ति में गिरावट महिलाओं में ब्रैस्ट कैंसर के कारण के रूप में सामने आ रहे हैं। शर्म की वजह से महिलाएं इस बीमारी को छिपाए रहती हैं। 60 फीसदी महिलाएं कैंसर की आखिरी स्थिति में जांच कराने के लिए डॉंक्टर के पास पहुंचती हैं, जिससे उनका इलाज नहीं हो पाता, इसलिए शरीर में होने वाले किसी भी बदलाव या गांठ की अनदेखी न करें। उम्र 40 से अधिक हो गई है तो हर साल डॉक्टर से जांच कराएं।

हड्डी रोग  
आज 10 में से लगभग 4 महिलाएं हड्डी से जुड़ी किसी न किसी समस्या से पीडित हैं। कम उम्र में गलत तरीके से बैठने—उठने, गलत जूतों का चयन आदि के कारण अक्सर स्पॉन्डिलाइटिस, फ्रैक्चर आदि की शिकार होती हैं, वहीं गर्भावस्था के दौरान शरीर में होने वाले परिवर्तन के कारण उनकी हड्डियां कमजोर होती हैं। गर्भावस्था एवं स्तनपान के दौरान महिलाओं में 3 से 5 प्रतिशत हड्डियों का घनत्व कम होता है, जिससे उनमें ऑस्टियोपोरोसिस और ऑर्थराइटिस का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है की 35 की उम्र के बाद से महिलाओं को नियमित कैल्शियम और विटामिन डी के सेवन की सलाह दी जाती है। 40 की उम्र के बाद हर 2 साल में एक बार बोन डेंसिटी टैस्ट जरूर करवाएं।

पीसीएस (पोलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) 
यह एक हार्मोनल डिसऑर्डर है, जिसका बहुत बड़ा कारण अनियमित जीवनशैली और बढ़ता मोटापा है। भारत में हर तीन में से एक महिला इस बीमारी से ग्रस्त है। हर महीने महिला की दाईं और बाईं ओवरी से अंडे बनने शुरू हो जाते हैं। ये अंडे 14-15 दिन में परिपक्व हो जाते हैं। सामान्य प्रक्रिया में ओवरी में अंडे के फूटने के 14वें दिन पर माहवारी आ जाती है। इस बीमारी में अंडे तो बनते हैं, पर फूट नहीं पाते, जिस कारण ओवरी में सिस्ट बन जाती हैं। इससे अनियमित पीरियड्स होते हैं। इस बीमारी के कारण रोगी के चेहरे पर बाल उगने, बार-बार मुहांसे होने, पिगमेंटेशन और गर्भधारण में परेशानी की समस्या आती है। इस बीमारी की जांच के लिए पेल्विक अल्ट्रासाउंड सबसे बेहतरीन तरीका है।

यूटरीन फाइब्रॉइड्स
यूटरीन फाइब्रॉइड्स जैसी समस्या अक्सर 20 से 45 वर्ष की महिलाओं में देखी जा सकती है। इस बीमारी में गर्भाशय की मांसपेशियों में छोटी-छोटी गोलाकार गांठें बन जाती हैं। शुरुआती तौर पर इस बीमारी के कोई लक्षण नजर नहीं आते, इसीलिए ज्यादातर महिलाओं को अपने गर्भाशय में बनी गांठों का पता गर्भावस्था के दौरान कराये गए अल्ट्रासाउंड के दौरान ही लग पाता है। इसका कोई खास कारण नहीं है, फिर भी कई मामलों में जिनेटिक असंगतता, आनुवंशिक और रक्त नलिका तंत्र की गड़बड़ी मुख्य कारण हो सकती है।

यूरिनरी ट्रैक्ट संक्रमण
ज्यादातर महिला अपने जीवन में कभी न कभी यूटीआई (यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन) की समस्या से रूबरू होती ही हैं। यह समस्या महिलाओं में 15 से 40 की उम्र के बीच अधिक देखी जाती है। इसमें यूरिनरी तंत्र बैक्टीरिया, फंगस या फिर वायरस के कारण संक्रमित हो जाता है। ऐसे मरीजों को अक्सर पेशाब करते हुए जलन होने, कम पेशाब होने, पेल्विक क्षेत्र में दर्द या चुभन होने, कभी-कभी पेशाब में हल्का खून आने आदि की शिकायत रहती है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

थाइरॉइड
आज भारत में हर 8 में से एक महिला थाइरॉइड की बीमारी से पीडित है। थाइरॉइड हमारे शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथियों में से एक है। शरीर कितनी तेजी से ऊर्जा खर्च करता है, कितना प्रोटीन बनाता है और दूसरे हॉर्मोन के प्रति कितना संवेदनशील है, इन सब कामों को थाइरॉइड नियंत्रित करता है। हमारी गर्दन में थाइरॉइड ग्लैंड होते है, जो दो तरह के थाइरॉइड हार्मोन टी—3 और टी—4 बनाते है, जो इन सब कार्यो को नियंत्रित करते हैं। थाइरॉइड ग्लैंड ज्यादा या कम दोनों ही स्थिति में महिलाओं की प्रजनन प्रणाली पर असर डालते हैं। एकदम से वजन बढ़े, बहुत ज्यादा ठंड लगने लगे, हर वक्त थकावट महसूस हो, गले में सूजन हो, आवाज में बदलाव आए, त्वचा और बालों की समस्या सामने आए तो डॉंक्टर से परामर्श लें।

वेजाइनल संक्रमण
अगर आप अपनी वेजाइना के आसपास चुनचुनाहट या लालीपन महसूस करती हैं तो यह डॉक्टर से संपर्क करने में देरी नहीं करनी चाहिए। इससे आपको मूत्र त्यागने और सहज सेक्स में तकलीफ हो सकती है।

डॉं. बन्दना सोधी,
गाइनोकलॉजिस्ट, मूलचंद वुमन हॉस्पिटल

टिप्स स्वस्थ जीवन के लिए

दिन भर सक्रिय रहें
टहलें तो हाथ को स्वतंत्र रूप से आगे-पीछे हिलने दें। लंच के बाद थोड़ा जरूर टहल लें और काम के दौरान हर एक घंटे में एक बार एक मिनट के लिए ब्रेक कर टहल लें। इनका नियमित पालन करें।

पौष्टिक नाश्ता रखें
घर में स्वस्थ और पौष्टिक नाश्ते के लिए पर्याप्त स्नैक्स रखें। अगर दिनभर कुछ खाते रहने की आदत है तो भी ऐसे स्नैक्स आपकी सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।

व्यायाम अपनाएं
सुविधा और सेहत की जरूरत को ध्यान में रखकर व्यायाम के कुछ तरीकों को अपनाएं। व्यायाम के लिए 20 मिनट का समय निकालें। चाहें तो हफ्ते में कुछ दिन इस 20 मिनट में आप जॉगिंग कर सकती हैं। इससे आपको पूरे शरीर को टोन रखने में सहायता मिलेगी।

खुश रहें
एक कहावत है कि हंसी सबसे अच्छी दवा है। अधिकांश डॉंक्टर भी मानते हैं कि यह 100 प्रतिशत सही है। तो फिर दिल से क्यों न हंसा जाए। अगर आप जोर से हंसती हैं या मुस्कराती भी हैं तो आपके शरीर में फील गुड हारमोन्स का स्रव होता है, जो तनाव पैदा करने वाले कोर्टीसोल नामक हार्मोन को नष्ट करता है। इससे आप ज्यादा सेहतमंद रह पाएंगी। हंसने से चेहरे की माशपेशियों का भी व्यायाम हो जाता है।

नाश्ता अच्छा हो
स्वस्थ रहने के लिए समय पर संतुलित नाश्ता और वर्कआउट आपके लिए जरूरी है। नाश्ते में ताजा फल को भी नियमित रूप से जरूर शामिल करें, क्योंकि फलों से आपके शरीर को ग्लुकोज मिल जाएगा और दिन भर आपका मूड अच्छा रहेगा। पर्याप्त ऊर्जा के लिए ताजे फलों के साथ सूखे मेवे निमयित रूप से लें।

पर्याप्त पानी पिएं
डीहाइड्रेशन से बचने और पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी लें। दिन भर में 3-4 लीटर पानी अवश्य पिएं। शराब, सिगरेट से दूर रहें।

पूरा कार्बोहाइड्रेट लें
इसके लिए फल और फाइबर से युक्त अन्य भोजन लें। अपने भोजन में दूध, दुग्ध उत्पाद, मेवे, दाल, स्प्राउट, सोयाबीन्स, टोफू, चिकन जैसे प्रोटीन और कैल्शियम से युक्त भोजन लें।

वजन के पीछे न पड़ें
अगर आप खुद को स्लिम बनाने के लिए वजन कम करने में लगी हैं तो सावधान हो जाएं। एक उम्र के बाद आप कुपोषण से संबंधित ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों की शिकार हो सकती हैं।

धड़कन पर नजर रखें
हृदय गति पर नजर रखें। अगर हृदय की गति काफी अधिक है तो इसका अर्थ है कि क्षमता से बहुत अधिक काम करने की कोशिश कर रही हैं। व्यायाम करने जाएं तो इसकी गति को आदर्श स्तर पर रखें।

ठीक तरह बैठें
अगर आप भी कम्प्यूटर पर काम करती हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि आपके कम्प्यूटर का मॉनिटर आंखों के बिल्कुल सीध में हो या थोड़ा ऊपर हो। इससे आपको बिना सिर झुकाए सामने देखने में आसानी होगी।

10 गलतियां जो आप करती हैं
भोजन न करना

स्वास्थ्य की दृष्टि से दिन भर में कम से कम 3 समय का भोजन लेना जरूरी है। अगर आप एक समय का भी भोजन नहीं करतीं तो इससे धीरे-धीरे मेटाबॉलिज्म का स्तर धीमा हो जाता है, जिससे शरीर में चर्बी की मात्रा बढ़ जाती है। भरपूर भोजन करें ताकि प्रोटीन, फैट और कार्बोहाइड्रेट्स की पूर्ति हो।

थकान की अनदेखी
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के एक अध्ययन के अनुसार महिलाओं में दिल का दौरा पड़ने के लक्षण पुरुषों से काफी अलग होते हैं। लगातार थकावट होना दिल का दौरा पड़ने का सबसे पहला लक्षण है। अगर सुबह उठते ही असामान्य तरीके से थकावट हो, पूरा दिन मुश्किल से निकले और सोने में दिक्कत महसूस हो तो डॉंक्टर से संपर्क करें।

बीमारियों की उपेक्षा
हर महिला को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि उनके परिवार में 50 की उम्र के बाद कौन-कौन सी बीमारियां पनपती हैं, जिससे पहले से ही एहतियात बरत कर उन बीमारियों से बचा जा सके।

ब्रेस्ट परीक्षण से परहेज
हमारे देश में आमतौर पर महिलाएं ब्रेस्ट परीक्षण को नजरंदाज करती हैं। डॉंक्टरों के मुताबिक हर महिला को 40 की उम्र पार करने के बाद मेमोग्राम (एक तरह का ब्रेस्ट परीक्षण) जरूर कराना चाहिए।

कैल्शियम न लेना
महिलाओं में 30 की उम्र के बाद हड्डियां कमजोर होनी शुरू हो जाती हैं, जो मेनोपॉज की अवस्था तक चलती है। इसलिए डाइट में कैल्शियम लेना महिलाओं के लिए बेहद जरूरी है।

व्यायाम न करना
व्यायाम को अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करें, ताकि पूरे दिन दुरुस्त रहने के लिए ऊर्जा मिल सके। विशेषज्ञों के मुताबिक रोजाना 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि से हड्डियां मजबूत होती हैं और तनाव से निजात मिलती है।

वजन बढ़ने देना
कई बार अस्पष्ट रूप से वजन का बढ़ जाना ब्रेस्ट कैंसर का एक लक्षण हो सकता है। अगर आपके पेट और कमर की चौड़ाई काफी बढ़ गई हो तो एक बार डॉंक्टर से पूरे शरीर का चेक-अप कराएं।

बार-बार पेशाब आना
बार-बार पेशाब आना डायबिटीज का एक लक्षण हो सकता है। खून में चीनी की मात्रा बढ़ने से डायबिटीज होती है। ऐसे में किसी डॉक्टर से संपंर्क कर, उनसे यूरीन टैस्ट और फिंगर-स्टिक ब्लड ग्लुकोज टैस्ट कराएं।

गंध की क्षमता खो देना
हर 70 सेकेंड में किसी व्यक्ति में अल्जाइमर का पता चलता है। कई बार स्मरणशक्ति कमजोर होने पर हमें लगता है कि बढ़ती उम्र की वजह से ऐसा हो रहा है, पर बढ़ती उम्र में स्मरणशक्ति कमजोर होने पर बीती बातें याद करने में दिक्कत होती है, जबकि अल्जाइमर में मरीज बीती बातें भूल जाता है। गंध की समस्या भी अल्जाइमर का लक्षण हो सकता है।

आराम न करना
जिम्मेदारी संभालते-संभालते महिलाएं पर्याप्त आराम और नींद नहीं ले पातीं। 8 घंटे की नींद और हफ्ते में एक दिन आराम से मांसपेशियों की मरम्मत हो जाती है।

30 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया की शिकार
30 प्रतिशत महिलाएं देश में एनीमिया की शिकार हैं।
40 से अधिक उम्र हो गई है तो हर साल ब्रैस्ट कैंसर की डॉंक्टर से जांच कराएं।
10 में से लगभग 4 महिलाएं हड्डी से जुड़ी किसी न किसी समस्या से पीडित हैं। यह समस्या समय के साथ तेजी से बढ़ती जाती है।

40 की उम्र के बाद हर 2 साल में एक बार बोन डेंसिटी टैस्ट जरूर करवाएं।
20 से 45 वर्ष की महिलाओं में यूटराइन फाइब्रॉइड जैसी समस्या अक्सर देखी जाती है।
08 में से एक महिला भारत में थाइरॉइड की बीमारी से पीडित है।

15 से 40 की उम्र के बीच महिलाओं में यूटीआई (यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन) की समस्या भी अधिक देखी जाती है।
60 फीसदी महिलाएं ब्रैस्ट कैंसर की आखिरी स्थिति में जांच कराने के लिए डॉंक्टर के पास पहुंचती हैं, जिससे उनका इलाज नहीं हो पाता है।

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