DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बदल रही सलाखों के पीछे की दुनिया

लखीमपुर-खीरी। अनिल वर्मा जेल के पीछे की दुनिया को अमूमन वहां संगीन जुर्मो के अपराध में बंद कैदियों की जरायमपेशा जिंदगी के लिए जाना जाता है। पर तस्वीर का शायद यह महज एक ही पहलू है। तस्वीर का एक दूसरा पहलू यह है कि जरायम की दुनिया से जुड़े रहे तमाम कैदी सलाखों के पीछे अपने बीते कल की कालिख से किनारा कर सर्व धर्म सद्भाव की बुनियाद मजबूत करने में जुटे हैं।

जेल में आधा दर्जन से ऊपर ऐसे मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाले कैदी हैं जो दिन-रात राम नाम की इबारतें लिखकर अपनी जरायमपेशा जिंदगी से तौबा करना चाहते हैं तो तमाम ऐसे कैदी भी हैं जो हिंदू होने के बावजूद इस्लाम धर्म की खूबियों से रूबरू हो रहे हैं। सलाखों की दुनिया के पीछे का ये खुशगवार सच उस समय सामने आया जब बीते रोज जेल के आधा दर्जन से ऊपर मुस्लिम कैदियों ने जेल अधीक्षक को एक अर्जी दी।

इस अर्जी में इन कैदियों ने उनसे राम नाम की इबारत लिखने की मंजूरी मांगी। जेल अधीक्षक आरके त्रिपाठी ने बताया कि पहले तो वह कैदियों की इस अर्जी से चौंके पर उसके पीछे की भावनाओं को सम्मान देते हुए उन्होंने इन कैदियों को रामनाम लिखने की मंजूरी दे दी। जेल अधीक्षक के मुताबिक जिन कैदियों ने रामनाम लिखने की अनुमति मांगी उनमें से ज्यादातर बंदियों पर डकैती, बलात्कार, लूट, हत्या जैसे संगीन अपराधों के आरोप हैं। अब ऐसे संगीन जुर्मो की सजा भुगतने के साथ ही अपराधी अपराध की दुनिया से छोड़ने की मंशा भी जाहिर करें तो इससे बेहतर क्या हो सकता है।

सलाखों के पीछे जिंदगी गुजारने वाले कैदियों का अध्यात्म की दुनिया से जुड़ना कोई नई बात नहीं है। जेल में तमाम ऐसे कैदी हैं जो अपनी जिंदगी आस्था के सहारे काट रहे हैं। शिक्षक राजाराम ने बताया कि 28 फरवरी तक कैदियों ने 3 करोड़ 50 लाख 34 हजार 650 बार रामनाम की इबारतें लिख डाली हैं, जो अब मशिाल बन चुकी है। इन कैदियों को देखकर अन्य कैदियों का मन बदल रहा है। वह अपने किए पर पछता रहे हैं और अपना भविष्य सुधारने के लिए राम की शरण में चले गए हैं।

जेल में सैकड़ो बंदी ऐसे हैं तो दिन-रात राम के नाम में लीन रहते हैं। ं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:बदल रही सलाखों के पीछे की दुनिया