DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

उ.प्र. में फटी जमीन

उत्तर प्रदेश के सूखाग्रस्त बुन्देलखण्ड समेत कई इलाकों में जमीन फटने की बढ़ती घटनाआें के बीच मुख्यमंत्री मायावती ने अधिकारियों को इस तरह की घटनाआें की पडताल करने का निर्देश दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में भूगर्भ जल के अत्यधिक दोहन की वजह से भूमि में दरार पड़ रही है। ड्ढr सूखाग्रस्त बुन्देलखण्ड तथा कानपुर और इटावा समेत राय के कई इलाकों में जमीन फटने की घटनाआें की सूचना मिलने पर मायावती ने गत शुक्रवार को यहां एक उच्चस्तरीय बैठक भी की थी। इस तरह की घटना के बारे में राय सरकार को सौंपी गई अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने दावा किया है कि जमीन फटने की घटना किसी भूगर्भीय गतिविधि के बजाए भूगर्भ जल के अत्यधिक दोहन की वजह से हो रही है। ड्ढr इस बीच, इन घटनाआें की जांच कर रहे भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण(जीएसआई) ने राय सरकार को भूगर्भ जल के अत्यधिक दोहन को नियंत्रित करने तथा भूगर्भ जल संसाधन को बढाने के लिए तत्काल कदम उठाने का सुझाव दिया है। जीएसआई ने स्थिति के मौका-मुआयने के लिए अपनी टीमें हमीरपुर, जालौन और इटावा भेजी हैं और वह इस बारे में राय सरकार कोअपनी विस्तृत रिपोर्ट कल दे सकता है। ड्ढr जीएसआई के उपमहानिदेशक दीपक श्रीवास्तव के अनुसार सूखाग्रस्त इलाकों में जमीन फटने अथवा उसमें दरार पड़ने की घटनाएं केवल मात्र भूगर्भ जल के अत्यधिक दोहन की वजह से हो रही हैं। पिछले हफ्ते इस क्षेत्र में हुई बारिश की वजह से भूमिगत जल की पहली परत रिचार्ज हो गई जिससे तनाव कम होने पर जमीन में दरार पड़ गई। ड्ढr उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि हमीरपुर और जालौन जिलों के गांवों का दौरा करने वाली टीम ने पाया कि जमीन फटने की घटनाएं उन्हीं जगहों पर हुई हैं जहां पानी की अत्यधिक दोहन की वजह से भूमि की सतह कमजोर हो गई थी। नदियों के करीब स्थित इलाकों में भी जमीन फटने की घटनाएं हुई हैं। ड्ढr श्रीवास्तव ने इस बात से इंकार किया कि इस तरह की घटनाएं भूकम्प आने का पूर्व संकेत हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि पशुपक्षियों को सबसे पहले भूकंप का पूर्वाभास होता है और जमीन फटने की घटनाआें से बेवजह आशंकित होने की जरूरत नहीं है।ड्ढr

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: उ.प्र. में फटी जमीन