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आप का नही खाप का असर जरूर दिखेगा चुनाव में

मुजफ्फरनगर। कार्यालय प्रतिनिधि।  दिल्ली में एक साल पूर्व जन्म लेकर सत्ता तक पहुंची आम आदमी पार्टी ने पूरे जोर से लोकसभा चुनाव लड़ने की भी घोषणा की है। वेस्ट यूपी में आप के असर को लेकर कयासबाजी चल रही है। लेकिन यहां अहम यह है कि खाप के असरदार होने के चलते यहां हर राजनीतिक दल उससे समर्थन पाने की जुगत में लगा रहता है। मुजफ्फरनगर जिले का देहात खाप के असर से प्रभावित रहता है।

दंगों के बाद यहां खाप पंचायतों का दौर बहुत तेजी से चला है। पिछले छह माह में दंगों के दौरान गांव-गांव में सैकड़ो पंचायतें पुलिस के खिलाफ हो चुकी है। गठवाला खाप तो दंगों के बाद काफी मुखर रही है। इन खाप पंचायतों में मुख्यत: भाजपा नेताओं की ही भागेदारी रही। हालांकि पूरे क्षेत्र में भाजपा के संजीव बालियान ने अपनी अलग ही पैंठ बनाई है। वह हर उस स्थान पर पहुंचकर लोगों की ढाल बने जहां पर लोगों को नेताओं की जरूरत पड़ी।

इसी कारण क्षेत्र के लोगों का कहना है कि भाजपा का टिकट उसे मिले जो दंगों में नामजद छह हजार लोगों की लड़ाई लड़ सके। खाप के जबर्दस्त असर के बीच आप का असर कोई अधिक सेंध लगा पाएगा इसमें संदेह है। खाप जरूर इस क्षेत्र में प्रभावी है। भाकियू के पूर्व अध्यक्ष स्व. चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत अपनी बालियान खाप का जबर्दस्त समर्थन मिलने के कारण ही देश की किसान राजनीति में छा गए थे। खाप का असर चुनावों को प्रभावित करता रहा है।

वर्ष 1991 में विधानसभा चुनावों से पूर्व चौधरी टिकैत के एक वाक्य कि किसान राम और ओम का नाम लेकर वोट डाल दे। इस वाक्य का इतना असर रहा कि भाजपा ने जाट बेल्ट में जबर्दस्त सफलता प्राप्त की थी और पहली बार यूपी में भाजपा की बहुमत की सरकार कल्याण सिंह के नेतृत्व में बन गई थी। ऐसे की कई उदाहरण हैं जब गांवों में हुई खाप पंचायतों ने चुनाव का नक्शा ही पलट दिया। इसी कारण देश के गृहमंत्री रहे मुफ्ती मोहम्मद सईद को भी करारी हार ङोलनी पड़ी थी।

यही कारण है कि इस बार भी चुनावों में नए राजनैतिक दल आप का असर कुछ खास नही रहेगा जबकि दंगों के बाद फर्जी नामजदगी के बाद सक्रिय हुई खाप का असर जरूर दिखाई देगा। अरविंद।

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  • Web Title:आप का नही खाप का असर जरूर दिखेगा चुनाव में