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सफदरजंग के डॉक्टरों ने नहीं किया काम

नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता।  कानपुर में डॉक्टरों के पिटाई में विरोध में गुरुवार को सफदरजंग अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टरों ने ओपीडी बंद रखी। हालांकि इससे पहले आईएमए के अनुरोध पर अन्य सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों ने पूर्व निर्धारित हड़ताल के फैसले को वापस ले लिया। जबकि आरडीए सफदरजंग का कहना है कि वह अपना आंदोलन जारी रखेगें, आईएमए एक निजी संस्था है जो हमारे हितों को नहीं समझती है। सफदरजंग आरडीए के डॉ. समीर प्रभाकरन ने बताया कि कानपुर के डॉक्टरों के समर्थन में बनाई गई बेवसाइट्स डॉक्टर्स अगेनस्ट इनजस्टिस को हाईजैक कर लिया गया, जो यूपी सरकार की अराजकता का उदाहरण है।

आरडीए ने कहा कि भविष्य में वह कभी सपा सरकार का समर्थन नहीं करेगें, आरोपी विधायक पर कार्रवाई करने की जगह यूपी सरकार मसले को टालने का मन बना रही है। मालूम हो कि विरोध के क्रम में डॉक्टरों ने क्रमिक अनशन भी शुरू किया है। रेजिडेंट डॉक्टरों के काम न करने का असर ओपीडी सेवाओं पर पड़ा, सुबह से ही मरीजों को इलाज के लिए इधर उधर भटकना पड़ा। जबकि हड़ताल की वजह से इमरजेंसी सेवाएं भी बाधित रहीं।

उधर एम्स आरडीए ने भी गुरुवार को जनरल बॉडी मीटिंग में विरोध जारी रखने का फैसला लिया गया। एम्स आरडीए ने कानपुर में डॉक्टरों के साथ हुई मारपीट के विरोध में हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। वहीं दूसरी तरफ आईएमए ने हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए हड़ताल वापस ले ली। आईएमए के डॉ. नरेन्द्र सैनी ने बताया कि कोर्ट ने न्यायिक जांच गठित कर तीन सप्ताह के अंदर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। आईएमए ने सफदजंग अस्पताल के डॉक्टरों की हड़ताल कोर्ट के फैसले के विपरीत बताया है।

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