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आत्मसमर्पण करनेवाले नक्सली को मिलेगी पुलिस की नौकरी

आत्मसमर्पण करनेवाले नक्सली को मिलेगी पुलिस की नौकरी

रांची अजय शर्मा। राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। चुनाव घोषणा के पहले यह फैसला लिया गया है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुलिस में नौकरी देने की अनुशंसा की गयी है। डीजीपी राजीव कुमार ने इस आशय का एक पत्र पांच मार्च को गृह सचवि एनएन पांडेय को लिखा है। सरकार के इस निर्णय की जानकारी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सात मार्च को केंद्रीय गृह मंत्रालय को दी जाएगी।

शुक्रवार को इस संबंध में विस्तृत जानकारी भारत सरकार के अधिकारी लेंगे, जिसमें एसआरइ, लोक सभा चुनाव की तैयारी और महत्वपूर्ण व्यक्तियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल किया जाएगा। इस मौके पर कैबिनेट सचवि भी रहेंगे।

क्या लिखा है डीजीपी ने : डीजीपी ने लिखा है कि समर्पण करने वाले नक्सलियों को दो श्रेणियों में रखा जाएगा। ए श्रेणी में जोनल कमांडर और उससे ऊपर के नक्सली होंगे और बी श्रेणी में जोनल कमांडर से नीचे के नक्सली शामिल होंगे।

ए श्रेणी के नक्सली अगर समर्पण करेंगे तो उनपर घोषित राशि के ईनाम के अलावा पांच लाख रुपया उन्हें अलग से दिया जाएगा। वहीं बी श्रेणी के नक्सली को उनके ऊपर घोषित ईनाम के अलावा ढाई लाख की राशि अलग से दी जाएगी।

प्रशिक्षण की व्यवस्था : समर्पण करने वाले नक्सली जब जेल में होंगे तो उन्हें बेहतर प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी, ताकि वे स्वावलंबी हो सकें। फिलहाल यह राशि तीन हजार रुपया प्रतिमाह है, जिसे बढ़ाकर पांच हजार रुपया करने का प्रस्ताव है।

बीमा : आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की बीमा सरकार कराएगी, जो पांच लाख रुपए की होगी। नक्सलियों के परिवार के पांच सदस्यों का भी बीमा होगा, जो एक-एक लाख रुपया का होगा। इसकी प्रीमियम की राशि भी सरकार भरेगी।

बच्चों की शिक्षा : समर्पण करने वाले नक्सलियों के बच्चों बेहतर स्कूल में पढ़ेंगे। इसके लिए कक्षा एक से पांच तक पढ़ने वाले बच्चों को प्रतविर्ष 10 हजार रुपया, कक्षा छह से सात तक में पढ़ने वाले को प्रतविर्ष 12 हजार रुपया, कक्षा आठ से 10 में पढ़ने वाले बच्चों को 15 हजार रुपया प्रतविर्ष, कक्षा 11 से 12 में पढ़ने वाले बच्चों को 20 हजार रुपया और स्नातक करने वाले बच्चों को 25 हजार रुपया प्रतविर्ष शिक्षण शुल्क के रूप में देने का प्रस्ताव है।

आवास : समर्पण करने वाले नक्सलियों को अगर भूखंड उपलब्ध कराने में सरकार को कठिनाई होगी तो उन्हें उनकी इच्छा के अनुसार शहर में रहने के लिए मकान किराए के रूप में प्रतिमाह 15 सौ रुपया दिया जाएगा। ताकि इनके परिजन शहर में रहें। यह राशि 10 वर्षो तक देय होगी।

कानूनी सहायता : सरकार समर्पण करने वाले नक्सलियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराएगी। इसके लिए हर जिला में अलग से फंड की व्यवस्था की जा रही है ताकि अधविक्ताओं को अलग से भुगतान किया जा सके।

एडीजीपी होंगे नोडल अफसर : विशेष शाखा के एडीजीपी इस मामले के नोडल अफसर होंगे। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास व्यवस्था को ये देखेंगे। जल्द ही इसका लाभ समर्पण करने वाले नक्सलियों को मिलेगा। हजारीबाग के ओपेन जेल में पूर्व में समर्पण किए 18 नक्सली रह रहे हैं।

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