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चटाई पर बैठकर पढ़ाई करते हैं बूटी मध्यविद्यालय के बच्चे

रांची। संवाददाता। राजकीयकृत मध्य विद्यालय बूटी में कक्षा 1 से 5 तक के 412 बच्चों चटाई पर बैठकर पढ़ रहे हैं। यह 5 से 10 साल तक के बच्चों हैं। यह चटाई भी उन्हें घर से लाना पड़ता है। यदि कोई कभी भूल जाता है, तो उसे फर्श पर ही बैठना पड़ता है। स्कूल में कु ल 629 बच्चों हैं। जिनमें कक्षा 6 से 8 तक को बेंच की सुविधा मिली हुई है। इनमें कुछ बच्चों टूटे बेंच पर बैठने को बाध्य हैं।

वहीं एक बेंच पर 5 से 6 बच्चों को बैठना पड़ रहा है। स्कूल की चहारदीवारी को असमाजिक तत्वों ने तोड़ दिया है। स्कूल के छत पर 13 हजार बोल्ट की तार लटकती रहती है। ऐसे में कभी भी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता है। बार-बार हो रही है चोरी प्रभारी प्राचार्या जूनिका कच्छप ने बताया कि स्कूल की चहारदिवारी को कई बार बनवाया गया है, लेकिन हर बार कोई न कोई तोड़ देता है। यहां कई बार चोरी हो चुकी है।

दो महिना पहले ही गैस सिलेंडर और दो बोरी चावल चोरी हो चुका है। मध्याहन भोजन बनानेवाली ने बताया कि अब तक चार सिलेंडर, 10 बोरा चावल और कई सामान चोरी हो चुका है। कई बार शिकायत किया गया है, कुछ नहीं होता है। बंद होगी पानी सप्लाईस्कूल में चापाकल होने के साथ निगम की तरफ से पानी भी सप्लाई किया जा रही है। लेकिन 2007 से बिल भुगतान नहीं किया गया है। अब तक यह 44 हजार पार कर चुका है।

पैसे नहीं होने की वजह से स्कूल प्रशासन ने पानी का कनेक्शन काटने को कह दिया है। इसके बाद की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है, जब 629 बच्चों से स्कूल में चापाकल सूखने पर पानी की किल्लत मचेगी। रात को घुसते हैं नशेड़ी रात को विद्यालय परिसर में शराबियों की अड्डेबाजी होती है। शिक्षक आसित कुमार ने बताया कि कई बार सुबह आने पर शराब की बोतलें मिलती हैं। यही नहीं, लोग ताला तोड़कर शौचालय भी गंदा कर जाते हैं।

विद्यालय के छत से लगा है बिजली का तार8वीं क्लास से सटी दीवार के ऊपर से 13 हजार बोल्ट की तार लटका हुआ है। प्रभारी प्राचार्या जूनिका कहती है कि उनलोगों को इस बात का डर हमेशा लगा रहता है कि कभी भी कोई दुघर्टना हो सकती है। कई बार विभाग को लिख कर दिया गया है। लेकिन अब तक कुछ नहीं हो सका है। कोट - कई बार दीवार को जोड़ा गया, फिर भी तोड़ दिया जाता है। चोरी की शिकायत की गई है।

लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। बेंच मिलेगा तब न बच्चों को बैठाएंगे। मिल ही नहीं रहा है तो क्या करें?जूनिका कच्छप, प्रभारी प्राचार्या।

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