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गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बनेगा रोडमैप : गीताश्री

रांची। संवाददाता। झारखंड में प्रितभाओं की कमी नहीं है। बावजूद इसके शोधार्थियों की संख्या लगातार घट रही है। राज्य में बेहतर शैक्षिणक माहौल नहीं होने से उच्च शिक्षा के लिए राज्य से युवाओं का पलायन जारी है। यह गंभीर मसला है। शिक्षा विभाग शैक्षिक विस्थापन रोकने और बेहतर शिक्षा नीति बनाने के लिए प्रयासरत है।

यह बातें मानव संसाधन मंत्री गीताश्री उरांव ने कहीं। वह गुरुवार को होटल बीएनआर चाणक्या में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स, रांची चैप्टर द्वारा आयोजित झारखंड उच्च शिक्षा सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि बोल रही थीं।

इसमें राज्य में उच्च शिक्षा की राह में आने वाली चुनौती, अवसर और उसके समाधान पर चर्चा हुई। इस मौके पर इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स, रांची चैप्टर के निदेशक कमल साही, एआईसीटीइ (दिक्षण-पूर्वी) के क्षेत्रीय अधिकारी एसके जेना, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ डीएन ओझा, बीआईटी के पूर्व वीसी डॉ पीके बरहई, रांची विवि के प्रोवीसी डॉ एम रिजउद्दीन, निलई ग्रुप के निदेशक प्रो महेंद्र झा, आरटीसी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की मैनेजर अंजिल आर सिंह, सीयूजे के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ सुजीत चौधरी आदि ने भी विचार रखे।

कॉरपोरेट घरानों से लेंगे सहयोगशिक्षा मंत्री ने कहा कि युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा नीति बनाने पर विचार हो रहा है। मौजूदा शिक्षा नीति वैश्वीकरण के दौर में कारगर नहीं है। राज्य में उद्योग-धंधों की कमी है। तकनीकी शिक्षा का अभाव है। बेरोजगारी बढ़ रही है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के विकास के लिए स्टूडेंट फ्रेंडली रोडमैप बनाना जरूरी है। यूजी कोर्स के साथ कुछ ऐसे प्रोग्राम बनाए जाएंगे,जिंनमें युवाओं को रोजगार के लिए भटकना नहीं पड़े। शिक्षा विभाग इसके लिए प्रयासरत है।

अगर जरूरत पड़ी तो औद्योगिक घरानों का भी सहयोग लिया जाएगा। खस्ताहाल है क्वालिटी एजुकेशन बीआईटी मेसरा के पूर्व वीसी डॉ पीके बरहई ने कहा कि राज्य में विश्वविद्यालयों का स्तर वर्तमान समय के लिए ठीक नहीं है। झारखंड में क्वालिटी एजुकेशन खस्ताहाल है। बेरोजगारी और एजुकेशनल विस्थापन प्रमुख समस्या है।

इससे निपटने के लिए लांग टर्म और शॉर्ट टर्म तकनीकी कोर्स लाना होगा। इसके लिए शिक्षा विभाग को औद्योगिक घरानों से मिलकर काम करना होगा। एडमिशन के समय काउंसिलिंग जरूरी रांची विवि के प्रोवीसी डॉ एम रिजउद्दीन ने कहा कि चीन और अमेरिका के बाद भारत उच्च शिक्षा में तीसरे स्थान पर है।

लेकिन शोधार्थियों की घटती संख्या चिंताजनक है। छात्रों और शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए एडिमशन के समय काउंसिलिंग करना आवश्यक है।

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