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जमुई डीएम पद के लायक नहीं: हाईकोर्ट

पटना। विधि संवाददाता। जमुई के डीएम पद पर बने रहने के लायक नहीं है। उन्हें कानून और अपने दायित्व का ज्ञान नहीं है तो जिलाधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पद से हट जाना चाहिए। यह बातें पटना हाईकोर्ट ने आवासीय क्षेत्र में पोस्टमार्टम हाउस से संबंधित मामले पर सुनवाई के दौरान कही। अदालत ने डीएम की ओर से दायर हलफनामा पर प्रश्न खड़ा करते हुए कहा कि जो बातें हलफनामा में कही गई है उसका मतलब समझ उन्हें आता है या नहीं।

अदालत ने उनकी ओर से पक्ष रखने वाले सरकारी वकील को हलफनामा वापस लेकर नए सिरे से इसे दायर करने की हिदायत दी। लेकिन सरकारी वकील ने हलफनामा को रिकार्ड पर रखने का अनुरोध अदालत से किया। साथ ही दो सप्ताह का समय देने की मांग की। अदालत ने उनके अनुरोध को मंजूर करते हुए दो सप्ताह का समय दे दिया। न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा तथा न्यायमूर्ति विकास जैन की खंडपीठ ने फरीद परवीन की ओर से दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई की।

सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने डीएम की ओर से एक हलफनामा दायर किया। हलफनामा में दिए गए जवाब पर अदालत ने कई प्रश्न किए। सरकारी वकील का कहना था कि 25 डिसमिल जमीन पर पोस्टमार्टम हाउस पिछले कई दशक से अवस्थित है। इसे अत्याधुनिक बनाने के लिए सरकार ने 69 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की है। उनका कहना था कि पोस्टमार्टम हाउस के समीप कई लोगों ने अवैध कब्जा जमा लिया है। अब वही लोग पोस्टमार्टम हाउस का विरोध कर रहे हैं।

अदालत ने कहा कि ये सब बातें हलफनामा में कहां लिखा हुआ है। अदालत का कहना था कि अवैध कब्जाधारियों को हटाने से किसने रोका है। सरकार अपना काम करें। अदालत ने डीएम की ओर से दायर हलफनामा को वापस लेकर नए सिरे से इसे दायर करने की बात कही।

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