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मुन्ना बजरंगी को कोर्ट ने बरी किया

जौनपुर। निज संवाददाता। मडिम्याहूं तहसील के जमालापुर में अठ्ठारह साल पहले हुए तहिरे हत्याकांड के मुकदमे में अपर सत्र न्यायधीश ने साक्ष्य के अभाव में गुरुवार को आरोपित प्रेम प्रकाश सिंह ऊर्फ मुन्ना बजरंगी ऊर्फ वीआईपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। कोर्ट का फैसला आने पर बजरंगी व समर्थकों ने राहत की सांस ली।

जबकि इसी मामले के एक आरोपित को हाईकोर्ट पहले ही उम्र कैद की सजा दे चुका है। दो आरोपितों की मुकदमे के दौरान मौत हो गयी जबकि एक आरोपित बरी कर दिया गया था। 24 जनवरी 1996 को जमालापुर तिराहे पर पूर्व प्रमुख कैलाशनाथ दुबे, तत्कालीन जिला पंचायत सदस्य राज कुमार सिंह व अमीन रहे बांकेलाल तिवारी को गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतार दिया गया था। आधा दर्जन के करीब लोग घायल भी हुए थे। पहली बार एके 47 का प्रयोग किया गया था।

आलम सिंह, गजराज सिंह, मुन्ना बजरंगी, राजेश दुबे, अभिषेक गुड्डु के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। बजरंगी फरार था जिसके चलते उसकी पत्रावली अलग कर दी गयी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान आलम सिंह को कोर्ट ने मृत्युदंड की सजा सुनायी गयी। हाईकोर्ट ने आरोपित की याचिका पर सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया। मुकदमे के दौरान ही गजराज सिंह व अभिषेक की मौत हो चुकी है। राजेश दुबे को कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।

मौजूदा समय में मुन्ना बजरंगी के पत्रावली की सुनवाई हो रही थी। दोनों पक्षों ने अपनी- अपनी बहस अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय बृजेन्द्र सिंह की कोर्ट में पूरी कर ली था। गुरुवार को अपर सत्र न्यायधीश ने साक्ष्य के अभाव में बजरंगी को बरी कर दिया। मृतक कैलाश दुबे के भाई सुभाष दुबे ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करने की बात कही है।

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