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हां कहिए, खुश रहिए

वह हमेशा कंफर्ट जोन में ही रहना चाहते हैं। किसी नए काम को ऐसे देखते हैं, जैसे कोई बुरा स्वप्न हो। इसीलिए दस साल पहले वह जो काम कर रहे थे, आज भी वही कर रहे हैं। वह ‘हां’ का साथ नहीं देते। आज तक शायद ही किसी चुनौती को उन्होंने ‘हां’ किया हो। एक चीनी कहावत है कि हां कहिए, खुश रहिए। हालांकि आप हमेशा हां कहकर खुश नहीं रह सकते, लेकिन ज्यादातर मामलों में हां आपकी बेहतरी के लिए काम करता है। थियेटर आर्टिस्ट और लेखक रॉबर्ट ग्रीन कहते हैं कि ‘नहीं कर सकने की सोच’ एक महामारी है, जिसने मानव जाति का सबसे अधिक नुकसान किया। ग्रीन कहते हैं कि जब भी हम अपनी ताकत को लेकर तटस्थ हो जाते हैं, हम दूसरे जीवों की तरह हो जाते हैं। जबकि ईश्वर ने हमें खासतौर से मानव बनाने के लिए चुना था। दरअसल, अपने बारे में आपका बोध ही तय करता है कि आप क्या हैं? हम जब भी किसी काम को लेकर नकारात्मक विचार लाते हैं, अपने जीवन में एक खालीपन पैदा कर रहे होते हैं। अमेरिकी मनोविज्ञान के जनक विलियम जेम्स ने कहा था कि नकारात्मक सोच बुरी बात नहीं, बुरी बात है अवचेतन शक्ति से उस पर वार न कर पाना।

उन्होंने कहा कि अवचेतन मन के पास असीमित ज्ञान और बुद्धिमता है। यह आपकी उन्नति के लिए जमीन-आसमान एक कर देगा, बशर्ते आप उससे अनुरोध करें। तो क्या हम अपनी ताकत से यह अनुरोध भी नहीं कर पाते? हाउ टू यूज योर हीलिंग पावर जैसी किताब के लेखक और साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर जे मर्फी मानते हैं कि ज्यादातर मामलों में हम उसे यही बताते रहते हैं कि मैं कुछ नहीं कर सकता। हमें कहना चाहिए कि मैं यह कर सकता हूं, बोलो इसमें तुम मेरी क्या मदद कर सकते हो? मर्फी कहते हैं कि बस इतने से आपको मदद भी मिलेगी और मार्गदर्शन भी। संभव तो हर चीज है, आप अपने कंफर्ट जोन से बाहर आकर तो देखिए।

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