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चीन का रक्षा बजट

क्या चीन के आक्रामक सैन्य-विस्तार का कोई अंत नहीं? इस देश ने अपने रक्षा बजट में पिछले साल की तुलना में 12.2 फीसदी की वृद्धि की है। चीन का रक्षा बजट कुलजमा 13.4 ट्रिलियन येन है, यानी 134 बिलियन डॉलर। यह जापान के रक्षा बजट से तीन गुना ज्यादा है। नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के सालाना अधिवेशन के पहले ही दिन रक्षा बजट के विस्तार की घोषणा की गई। कुल सरकारी खर्च में 9.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की तुलना में प्रस्तावित रक्षा व्यय बहुत अधिक है। हालांकि, यह प्रवृत्ति नई नहीं है। साल 1989 से ही चीन का सैन्य खर्च 10 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ रहा है। इसमें साल 2010 अपवाद है। गौरतलब है कि बीजिंग सैन्य विस्तार की गति को बढ़ाता जा रहा है, जबकि देश का आर्थिक विकास धीमा होने लगा है। चीन द्वारा हथियारों के निरंतर विकास और उस पर अधिक पूंजी खर्च करने का मकसद क्या है? यह भी सच है कि उसकी बढ़ती सैन्य ताकत से पूरी दुनिया की चिंता बढ़ गई है।

चीन के प्रधानमंत्री ली केकियांग ने कहा है, ‘राष्ट्रीय सुरक्षा और उच्च तकनीक वाले हथियारों व उपकरणों के विकास के लिए सरकार विज्ञान और तकनीकी शोध पर अधिक जोर देगी।’ एक अन्य चिंताजनक प्रतिक्रिया में उन्होंने कहा कि ‘हम एक सुदृढ़ नौसेना शक्ति बनने की दिशा में प्रयास करेंगे।’ चीन द्वारा बनाया गया पहला विमानवाहक पोत लियोनिंग साल 2012 से कार्यरत है और खबरों के मुताबिक, वह दूसरा विमानवाहक पोत बना रहा है। चीन अपने परमाणु शस्त्रगार को और बढ़ाएगा। इसके अलावा, अधिक लंबी दूरी की अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल की तैनाती की जा रही है। वह साइबर स्पेस व अंतरिक्ष, दोनों में अपनी सैन्य-क्षमता को विस्तार देने की योजना रखता है। चीन का यह रक्षा बजट अधिक है। पर यह भी बताया जा रहा है कि इसमें दूसरे देशों से खरीदे जाने वाले हथियारों और विज्ञान व प्रौद्योगिकी के खर्चों को शामिल नहीं किया गया है। साफ है, बीजिंग अपनी सैन्य-नीति में पारदर्शिता नहीं बरतता और लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय जगत में इसके लिए चीन की आलोचना होती आई है। पर कुछ भी नहीं बदला है।  
द असाही शिम्बून, जापान

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