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शेयर बाजारों पर महंगाई का असर

पिछले चार सप्ताह से बिकवाली की मार झेल रहे देश के शेयर बाजारों में आगामी सप्ताह भी उठापटक बने रहने की अधिक संभावना है। तेरह जून को समाप्त हुए सप्ताह में भारी बिकवाली के दबाव में बीएसई का सेंसेक्स और एनएसई का निफ्टी प्रत्येक करीब ढाई प्रतिशत गिरकर इस वर्ष के न्यूनतम स्तर तक गिर गए। बाजार विशलेषकों का कहना है कि वर्तमान में जो परिस्थितियां हैं, उन्हें देखते हुए उठापटक का दौर बने रहने की संभावना है। विशलेषक मानते हैं कि उठापटक सीमित दायरे में रह सकती है। दिल्ली शेयर बाजर के पूर्व अध्यक्ष और ग्लोब कैपीटल मार्केट्स लिमिटेड के प्रमुख अशोक कुमार अग्रवाल की राय में देश-विदेश में जो फिलहाल हालात हैं वह शेयर बाजारों में मजबूती के पक्ष में नजर नहीं आ रहे हैं। विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका मंदी के दबाव में है। यहां महंगाई का असरड्ढr चौतरफा है। श्री अग्रवाल का कहना है कि ब्याज दरों में वृद्धि को लेकर अंदेशा बरकरार है। रिजर्व बैंक के रेपो दरों में चौथाई प्रतिशत की बढ़ोत्तरी से बैंकों के ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी देर सबेर होनी लगभग निश्चित है। इस दिशा में जम्मू एंड कश्मीर बैंक ने अपनी प्रधान ब्याज दर को एक प्रतिशत बढ़ाकर 14 प्रतिशत कर दिया है। देश के अग्रणी वाणिज्यिक बैंक स्टेट बैंक का कहना है कि वह अभी कुछ इंतजार करेगा।ड्ढr श्री अग्रवाल का कहना है कि ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी से रियलटी और बैंकिंग क्षेत्र प्रभावित होंगे। प्रापर्टी में मांग वैसे ही सुस्त है और अगर आवास ऋण में बढ़ोत्तरी हुई, तो इससे असर और गहरा सकता है। ब्याज दर बढ़ने से आटोमोबाइल क्षेत्र पर भी असर पड़ेगा। तेरह जून को समाप्त हुए सप्ताह में विदेशी बाजारों में गिरावट, महंगाई के सात वर्ष के शिखर 8.75 पर पहुंचने, रिजर्व बैंक के रेपो दर बढ़ाने और विदेशी संस्थानों की बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स 382.56 अंक अर्थात 2.46 प्रतिशत के नुकसान से 1518अंक रह गया। पिछले चार सपताह के दौरान सेंसेक्स में 2045.32 अंक अर्थात 11.73 प्रतिशत की गिरावट आई। इस वर्ष दस जनवरी के 21206.77 अंक के रिकार्ड की तुलना में सेंसेक्स 28.37 अंक अर्थात 6017.15 अंक लुढ़क चुका है। सप्ताह के दौरान सेंसेक्स 41 सप्ताह के न्यूनतम स्तर 14645.31 अंक तक लुढ़का। एनएसई का निफ्टी 110.70 अंक अर्थात 2.3प्रतिशत गिरकर 4517.10 अंक पर बंद हुआ। विदेशी संस्थान जून माह के दौरान 5300 करोड़ रुपए की बिक्री कर चुके हैं। इस वर्ष इनकी बिकवाली 20 हजार 600 करोड़ रुपए पर पहुंच चुकी है।ड्ढr सप्ताह के दौरान अप्रैल माह के औद्योगिक उत्पादन में मार्च के तीन प्रतिशत की तुलना में सात प्रतिशत की बढ़ोत्तरी से शेयर बाजारों को कुछ आस बंधी थी, किंतु महंगाई सब पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है।

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  • Web Title: शेयर बाजारों पर महंगाई का असर