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पाक मीडिया : अफगान सरहद पर नया घमासान

चालीस सैनिक अभी तक लापता हैं। इसके अलावा दर्जनों फौाी और आम लोग जख्मी हो गए। बीबीसी के मुताबिक यह हमला तब हुआ जब अफगानी फौा आतंकवादियों का पीछा कर रही थी जो हमेशा की तरह पाकिस्तान सीमा में घुस रहे थे।एक और समाचार के मुताबिक अफगान फौा एक ऊंचे स्थान जो पाकिस्तान में था पर अपनी एक चौकी बनाने का प्रयास कर रही थी कि पाकिस्तानी तालिबानों ने उन पर हमला बोल दिया। इसके चलते अमेरिका व नाटो सैनिकों ने उन पर मिसाइलों से हमला कर दिया। ‘डॉन’ के मुताबिक अमेरिकी मानवरहित यान दक्षिणी वजीरिस्तान के कई इलाकों में उड़ते नार आए। इन इलाकों के लोगों ने यह भी बताया कि दो यान इतना नीचे उड़ रहे थे कि वह भयभीत हो गए। पर कई बम गिराए गए जो जंगल में गिर और भारी आग लग गई। पाकिस्तान सरकार और फौा ने इसे ‘बिना कारण और डरपोक कारनामा’ बता कर इसकी बड़ी भर्त्सना की है। संसद में बोलते हुए प्रधानमंत्री गिलानी ने इसकी निंदा करते हुए कहा हम इस घटना को अपनी स्वतंत्रता पर चोट मानते हैं और इस तरह की घटनाएं अपनी धरती पर नहीं होने देंगे।ड्ढr लाहौर में वकीलों के ‘लाँग मार्च’ को संबोधित करते हुए नवाज शरीफ ने कहा कि मुशर्रफ ने अपने देश को इतना कमजोर बना दिया है कि दूसर देशों के सैनिक आकर हमार लोगों को कत्ल कर रहे हैं। अमेरिका हालांकि इस हादसे को दुर्भाग्यपूर्ण मानता है जहां तक पाकिस्तान से मित्रता का सवाल है पर यह कह रहा है कि अभी तक मिले सबूतों के मुताबिक यह घटना उनकी गलती से नहीं हुई। इसके सबूत में उन्होंने एक वीडियो दिखाया। जो भी हो अब यह लड़ाई सामने आ गई है।ड्ढr अमेरिकी इंटेलीजेंस की कई रिपोर्टों के अनुसार फाता के यह इलाके तालिबानियों और अलकायदा के सुरक्षित गढ़ हैं और अफगानिस्तान की कराई सरकार कामयाब नहीं हो सकती जब तक आतंकवादियों का पाकिस्तान में सफाया न किया जाए। अब जबकि नई सरकार आतंकवादियों से समझौते की बात कर रही है, अमेरिका ने इन आतंकवादियों को खत्म करने की ठान ली है जो बहुत मुश्किल काम है। उधर तालिबानी भी अपनी नार रखे रहते हैं और समय-समय पर ‘अमेरिका का साथ देने वाले देशद्रोहियों’ को मौत की सजा देते रहते हैं। हाल ही में तालिबानियों ने एक महिला को कत्ल कर सड़क पर फेंक दिया। महिला की लाश पर एक कागज पर लिखा था कि अमेरिका के लिए इंटेलीजेंस करने वालों का यही अंजाम होगा।ड्ढr ‘डॉन’ ने लगातार दो दिनों में अपने सम्पादकीय में लिखा कि यह पहला बड़ा हमला है जबकि नई सरकार आतंकवादियों से बातचीत कर रही थी। लगता है कि सरकार कमजोर लग रही है और बाहर की ताकतों को यह समझ नहीं आ रहा कि किससे बातचीत कर। केन्द्र की सरकार कुछ और प्रांतीय सरकार कुछ और कह रही है।ड्ढr पत्र ने यह भी लिखा है कि यह तय करना जरूरी है कि क्या अमेरिका के मिसाइलों के हमले पाकिस्तान सरकार की सहमति से होते रहे हैं। पत्र आगे कहता है कि अमेरिका को भी चाहिए कि वह समझ से काम ले और मार-काट से दिल नहीं जीते जाते बल्कि और आतंकवादी पैदा होंगे।ड्ढr मुशर्रफ और वकीलड्ढr परवेज मुशर्रफ ने इस्तीफा देने से इंकार कर दिया और यह भी कह दिया कि अगर सरकार ने संवैधानिक अधिकारों से छेड़छाड़ की तो वह चुप नहीं बैठेंगे।ड्ढr उनका इशारा धारा 58 (2 बी) की तरफ था, जिसके अनुसार जरूरत पड़ने पर वह संसद को भी भंग कर सकते हैं। इस पर बोलते हुए जमायत-ए-इस्लामी के नेता लियाकत बलूच ने चिंता जाहिर की, क्या मुशर्रफ कोई सख्त कदम उठा कर कोई नई चाल न चल दे। संसद में संविधान संशोधन जो पीपीपी पेश करने जा रही है में राष्ट्रपति के अधिकारों सहित 50 संशोधन शामिल हैं जिनको पास करने में काफी वक्त लग सकता है।ड्ढr ‘दि नेशन’ ने लिखा है अगर पीपीपी प्रजातांत्रिक शक्ितयों के साथ चलना चाहती है तो जल्द और मजबूत कदम उठाए।ड्ढr अगर ऐसा नहीं होता तो मुशर्रफ खुद गद्दी नहीं छोड़ेंगे। ऐसा लगता है कि पीपीपी बातें तो कर रही है, पर अंदर से मुशर्रफ का साथ दे रही है।ड्ढr

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