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पुलिस को अलग कानून की दरकार

समाज के हर वर्ग में संवेदनहीनता है, बस उसे बाहर आने का मौका मिलना चाहिए। राजनीतिज्ञ तो राजनीति करने के लिए ही हैं, लेकिन असली चिंता तो पुलिस और मीडिया को लेकर है।ड्ढr एक को समाज की सुरक्षा के लिए तनख्वाह दी जाती है तो दूसरे की जिम्मेदारी खबरं देने की है, न कि उसे सनसनीखे बनाने की। हम सिर्फ आरुषि की ही बात क्यों करते हैं। यहां सरिताएं भी तो हैं जो बलात्कार के बाद आत्महत्या के लिए मजबूर हो जाती हैं। चंडीगढ़ में दिन के समय दुर्घटना के बाद एक दंपती चौराहे पर पड़े रहे किसी पुलिसवाले ने उनकी सुध नहीं ली।ड्ढr पुलिस की संवेदनहीनता को दर्शाने वाली ऐसी घटनाओं की कमी नहीं है। वे तानाशाहों की तरह काम करते हैं। पुलिसकर्मियों को लगता है कि वे कानून से ऊपर हैं। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने घरों का वातावरण बिगाड़ कर रख दिया है। टीआरपी के चक्कर में सेक्स और हिंसा से भर समाचार दिखाए जाते हैं। मीडिया को भी अपनी जिम्मेदारियों के एहसास के लिए अंतरावलोकन की जरूरत है।ड्ढr आरके गर्ग, चंडीगढड़्ढr नेपाल में परिवर्तन स्वागतयोग्यड्ढr नेपाल की संविधान सभा के चुनाव में माओवादियों को बहुमत मिलने के बाद से खूनी तख्तापलट की आशंका बढ़ती जा रही थी, लेकिन नेपाल नरश ज्ञानेन्द्र ने जिस प्रकार जनादेश स्वीकार कर महल खाली करके जनप्रतिनिधियों को सत्ता सौंपी, वह स्वागतयोग्य है। नेपाल नरश की जो भी छवि हो, नवनिर्वाचित सरकार को भी शाही परिवार की गरिमा का ख्याल अवश्य रखना चाहिए। अब वहां लोकतंत्र लागू होने के बाद ज्ञानेंद्र को भी चुनाव जीतकर सरकार में शामिल होने का पूरा मौका दिया जाना चाहिए। नई सरकार सभी पूर्वाग्रहों और दुराग्रहों को छोड़कर देश के विकास के लिए योजनाएं तैयार कर।ड्ढr जयंत बर्मन, सेक्टर 46, चंडीगढड़्ढr बातचीत में अवरोध कैसाड्ढr गुर्जर आंदोलन के नेता कर्नल किरोड़ी बैंसला सरकार के साथ बातचीत के दौरान अनावश्यक बातों को लेकर रोड़े अटकाते रहते हैं। उनकी हरकतें से लगता है कि वे मामले को विधानसभा चुनाव तक खींचना चाहते हैं। भाजपा भी यह मान चुकी है कि इस बार राज्य से उसका बोरिया-बिस्तर बंध जाएगा। तो इस मुद्दे पर कोई फैसला किए बिना यह कार्यकाल पूरा कर लिया जाए। फिर यह सांप अगली सरकार के गले में अपने आप डल जाएगा। कर्नल बैंसला के प्रयासों में अब ईमानदारी की झलक बहुत कम दिखाई दे रही है।ड्ढr शिवराज गुर्जर, सेक्टर 71, मोहालीड्ढr महिलाओं की दुर्दशा क्यों?ड्ढr इन दिनों महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होती जा रही है। बाहर की बात क्या करं, आज महिलाएं अपने घर की चहारदीवारी में भी सुरक्षित नहीं हैं।ड्ढr पति, पिता, भाई और पुत्र के जो रिश्ते महिला की रक्षा करने के लिए होते हैं आज सबसे ज्यादा खतरा उन्हीं से है। खून के रिश्तों में पैदा हो रही यह असहिष्णुता समाज के लिए घातक संकेत है। अगर रक्षक ही भक्षक बन जाएगा तो कैसे काम चलेगा? समाज के शुभचिंतक इस पर चिंतन करं।ड्ढr अंजलि कपूर, सेक्टर 27, चंडीगढ़

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