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अच्छी सेहत के लिए अच्छे दांत जरूरी

अच्छी सेहत के लिए अच्छे दांत जरूरी

दुनिया भर में आज डेंटिस्ट डे मनाया जाता है। यूं तो दांतों की सफाई तुम सभी करते हो, पर तुममें से कम बच्चों को ही पता होगा कि स्वस्थ रहने में दांतों का अहम रोल होता है। जरा सी लापरवाही तुम्हारे दांतों को खराब कर सकती है।

स्वस्थ दांत अच्छी सेहत के लिए बहुत जरूरी हैं, क्योंकि हम उनकी मदद से ही खाने को अच्छी तरह चबाते हैं, जिससे वह अच्छी तरह पच जाता है। अगर खाना अच्छी तरह से नहीं पचेगा तो हमारे शरीर को सही तरीके से पौष्टिक तत्त्व नहीं मिलेंगे। अगर तुम्हारे दांत ठीक नही होंगे और तुम खाने को अच्छी तरह से नहीं चबाओगे तो आंतों को बहुत मेहनत करनी पड़ती है, जिससे पेट की बीमारियां हो जाती हैं। इसलिए दांतों का स्वस्थ और मजबूत रहना जरूरी है।

इन बातों को गांठ बांध लो
सुबह और रात में सोने से पहले ब्रश जरूर करो। इससे दांत स्वस्थ और सुंदर रहेंगे।
दांतों पर बहुत जोर देकर ब्रश नहीं करना चाहिए, इससे दांत जल्दी घिस जाते हैं और बहुत सेंसेटिव हो जाते हैं।
कुछ भी खाने के बाद अच्छी तरह से कुल्ला जरूर करो, इससे दांतों में कैविटी का खतरा बहुत कम हो जाता है। दरअसल खाना खाने के बाद उसके कुछ कण मुंह में रह जाते हैं। कुछ देर बाद बैक्टीरिया उन कणों को एसिड में बदल देते हैं, जिससे आगे चल कर दांतों में कीड़े लग जाते हैं और उसमें कैविटी यानी सुराख हो जाता है।
हर छह महीने बाद दांतों का चेकअप कराना चाहिए।
प्यास लगने पर स्वीट ड्रिंक की जगह पानी पीना ज्यादा बेहतर होता है। इसलिए हर रोज खूब सारा पानी पियो।

इनसे बचो
बहुत ज्यादा मीठा, चॉकलेट और फास्ट फूड नहीं खाना चाहिए। इससे मुंह में एसिडिटी होती है और दांतों को नुकसान पहुंचता है। मीठा खाने के बाद मुंह अच्छे से धोना या फिर च्युइंग गम चबाना चाहिए।
जिस सॉफ्ट ड्रिंक में झाग या फेन (फिजी ड्रिंक) होता है, वह दांतों के लिए अच्छा नहीं होता। उसमें एसिड होता है, जो इनामेल को नुकसान पहुंचा सकता है और दांतों को पतला कर सकता है।
बाजार में जो पैक्ड फ्रूट जूस आते हैं, उनमें चीनी और एसिड होता है, इसलिए उसे कम से कम पियो और जब भी पियो, स्ट्रॉ से पियो।

बात दांत की
सबसे पहले जो दांत आते हैं, उन्हें डिसिजुअस टीथ (झड़ जाने वाले दांत) कहते हैं। इन्हें ‘दूध के दांत’ भी कहा जाता है। जैसे पतझड़ में पेड़ों से पत्ते झड़ जाते हैं, उसी तरह ये दांत भी झड़ जाते हैं। आमतौर पर दूध के दांतों की संख्या 20 होती है। ये दांत करीब छह माह की उम्र से आने शुरू होते हैं और छह साल की उम्र से झड़ने शुरू हो जाते हैं और 12 साल की उम्र तक ये सारे दांत झड़ जाते हैं। इन्हें ‘प्राइमरी टीथ’ भी कहा जाता है।
दूध के दांत गिरने के बाद जो दांत आते हैं, उन्हें ‘परमानेंट टीथ’ यानी पक्के दांत कहा जाता है। इन्हें ‘एडल्ट टीथ’ भी कहा जाता है। इनकी संख्या 32 होती है। अगर इनकी सही तरीके से देखभाल की जाए तो ये जिंदगी भर साथ निभाते हैं।
दांतों के दो मुख्य भाग होते हैं- क्राउन (ऊपरी हिस्सा) और रूट (वह हिस्सा, जो दिखाई नहीं देता)
दांतों की तीन लेयर होती हैं- इनामेल, डेंटाइल और पल्प। पल्प दांत का भीतरी मुलायम हिस्सा होता है।

दांत के प्रकार
इन्साइजर (कृंतक दांत)- ये खाने को काटने के काम आते हैं।
कैनाइन (श्वान दांत)- ये खाने को चीरने-फाड़ने के काम आते हैं।
प्री-मोलर्स या मोलर्स (दाढ़)- ये खाने को चबाने और पीसने के काम आते हैं।

मम्मी-पापा के लिए टिप्स
बच्चे के दांत निकलने से पहले उसके मसूढ़ों को कॉटन के कपड़े से पोंछ कर साफ करें। कपड़ा बिल्कुल साफ होना चाहिए।
बच्चे का पहला दांत निकलते ही उसे गुनगुने पानी से ब्रश कराएं।
जब तक बच्चे अपने आप मुंह से पानी बाहर निकालना यानी कुल्ला करना न सीख जाएं, उन्हें टूथपेस्ट से ब्रश न कराएं।
ब्रश सॉफ्ट ब्रिसल वाले होने चाहिए, ताकि ब्रश करते समय मसूढ़े न छिल जाएं। और हां, ब्रश का सिरा छोटा होना चाहिए। इससे ब्रश पीछे के दांतों की सफाई भी कर सकेगा। ब्रश के एक-तिहाई हिस्से पर ही पेस्ट लगाएं।
टूथब्रश दो-तीन महीने बाद बदल दें। अगर उसके ब्रिसल्स इस अवधि से पहले ही फैल जाते हैं या खराब हो जाते हैं, तब भी ब्रश बदल दें।                                                              प्रीति शर्मा
(डॉंक्टर अमोघ तंवर से बातचीत पर आधारित)

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