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नए दिशा-निर्देश भी सवालों के घेरे में आए

स्थानांतरण श्रेणी में 5 अंक देने के प्रावधान को रद्द करने के बाद नर्सरी दाखिले के लिए उपराज्यपाल द्वारा जारी नए दिशा-निर्देश पर हाईकोर्ट ने भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हाईकोर्ट ने कहा है कि नए दिशा-निर्देश को देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि सभी बच्चों को नर्सरी दाखिले के लिए समान अवसर नहीं मिल रहे हैं। हाईकोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि नर्सरी दाखिले में किसी भी बच्चे के साथ किसी भी तरह का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।

जस्टिस मनमोहन ने उपराज्यपाल डॉं. नजीब जंग को इस मसले पर गुरुवार तक अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने अभिभावकों की ओर से दाखिल याचिका पर विचार करते हुए यह निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि 27 फरवरी को जारी दिशा-निर्देश से स्थानांतरण श्रेणी में आवेदन करने वाले लोगों को दाखिले में समान अवसर नहीं मिल पा रहा है।

हाईकोर्ट ने दिल्ली प्रशासन से कहा है कि गुरुवार तक अभिभावकों की मांग पर अपना रुख स्पष्ट करें अन्यथा अदालत आदेश पारित करेगी। हालांकि, हाईकोर्ट अभिभावकों की उस मांग से सहमत नहीं था जिसमें स्थानांतरण श्रेणीके अंक को फिर से बहाल करने की मांग की जा रही थी।

हाईकोर्ट ने कहा कि यह संभव नहीं है लेकिन याचिकाकर्ता सहित इस तरह के किसी भी अभिभावक के बच्चों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा।

दरअसल, उपराज्यपाल ने 27 फरवरी को स्थानांतरण श्रेणी के अंक का बड़े पैमाने पर हो रहे दुरुपयोग को    देखते हुए इसे रद्द कर दिया था। इसके साथ ही डॉं. जंग ने न सिर्फ इस श्रेणी के पांच अंक लेकर दाखिला पाने वालों और लॉटरी में आई प्रतीक्षा को भी रद्द कर दिया था। अभिभावकों ने इसे मनमाना बताया था।

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