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चुनावी आहट सुनते ही दलों का मल्लयुद्ध उभरा

बेरमो। सुबोध सिंह। पवार लोकसभा चुनाव के पद्चाप सुनते ही दलों के पतझड़ शुरू हो चुके हैं। जो दल पतझड़ से वंचित है उसके अखाड़े में नेताओं का मल्लयुद्ध चल रहा है। गैरों से ज्यादा अपने ही दल के नेताओं के हमले से ज्यादा आहत हो रहे हैं। इस परिस्थिति से भाजपा, कांग्रेस, झामुमो, आजसू और झाविमो पार्टी खासतौर से दो चार हो रही है।

समरेश के खिलाफ झाविमो में मोर्चा बंदी झारखंड विकास मोर्चा के विधायक समरेश सिंह के खिलाफ केन्द्रीय नेता आशुतोष वर्मा ने गिरिडीह सीट पर दावेदारी के सवाल पर खुलेआम मोर्चा खोल रखा है।

समरेश सिंह ने दो टूक कहा है कि पार्टी प्रत्याशी के रूप में पूर्व विधायक डा शबा अहमद या विधायक ढुल्लू महतो के अलावा कोई मान्य नहीं है। जिस पर श्री वर्मा ने समरेश सिंह को ललकारते हुए कहा कि पार्टी किसी एक का नहीं है। जबकि पार्टी पदाधिकारियों का आपसी अंतर्विरोध अब सड़कों पर है।

संडेबाजार में पदाधिकारियों के बीच धक्कामुक्की और जिलाध्यक्ष जयदेव राय के खिलाफ निंदा प्रस्ताव तक पारित हो चुके हैं। सांसद के खिलाफ पर्चाबाजी सांसद रवीन्द्र कुमार पांडेय को टिकट न मिले इसके लिए पूर्व सांसद राजकिशोर महतो, पूर्व विधायक योगेश्वर महतो बाटुल, भाजपा उपाध्यक्ष विरंची नारायण और प्रदेश प्रवक्ता डा प्रह्लाद वर्णवाल ने अपनी-अपनी दावेदारी ठोकी है।

दूसरी तरफ भाजपा के ही असंतुष्ट खेमा लगातार तीन पर्चा जारी कर सांसद और उनके समर्थकों की नींद हराम किए हुए है। सांसद रवीन्द्र कुमार पांडेय कहते हैं कि संगठन के अंदर चुनाव लड़ने की इच्छा व्यक्त करना गलत नहीं है, लेकिन छल-प्रपंच रचकर किसी की छवि खराब करने से अंतत: पार्टी को ही नुकसान है।

अपने ही विधायक को पुतला जला रहे हैं झामुमो कार्यकर्ता झामुमो विधायक जगरनाथ महतो इन दिनों परेशान है अपने ही बचपन के दिनों से मित्र सह विधायक प्रतिनिधि गौरीशंकर महतो से। राजनीतिक महत्वाकांक्षा की टकराहट से दोनों के रशि्ते छत्तीस के हो चुके हैं।

आलम यह है कि विधायक श्री महतो ने जब गौरीशंकर को अपने प्रतिनिधि के पद से मुक्त किया तो प्रतिक्रि या मे गौरीशंकर के नेतृत्व में उनके समर्थकों ने मुंगो में उनका पुतला दहन कर आक्रोश व्यक्त किया।

आजसू जिलाध्यक्ष ने त्याग पत्र दिया आजसू जिलाध्यक्ष संतोष कुमार महतो और बेरमो विधानसभा क्षेत्र के आजसू पर्यवेक्षक काशीनाथ सिंह के बीच चल रहे महाभारत का नतीजा यह हुआ कि श्री महतो ने पार्टी को ही त्याग दिया। 

महतो की पार्टी से शिकायत है कि उन्होंने पार्टी के स्थापना काल से ही संगठन की मजबूती के लिए खून-पसीना बहाते रहे हैं। लेकिन दल-बदलुओं के प्रभाव में पार्टी अब अपने समर्पित कार्यकर्ताओं से दूर हो चुकी है। कांग्रेस में तकरार कांग्रेस पार्टी की राजनीति की विशेषता है कि इसका सांगठनिक ढांचे की खास अहमियत नहीं होती।

फिर भी कमेटी का विस्तार जो हुआ उससे कांग्रेसी नेताओं का वाकयुद्ध एक-दूसरे के खिलाफ चल रहा है। कांग्रेस के वरीय नेता हंसराज प्रसाद जैसे एक दर्जन से अधिक नेताओं ने जिलाध्यक्ष मंजूर अंसारी को पद से हटाने की मांग कर रहे हैं।

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