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बिहारकी ‘आत्मा’ ने बाजी मारी

पूर्वी और उत्तर पूर्वी राज्यों की समीक्षा के दौरान बिहार की ‘आत्मा’ ने बाजी मार ली। राज्य में ‘आत्मा’ की गतिविधियां समीक्षा के दौरान चर्चा में रहीं। केन्द्र से आये अधिकारियों ने बिहार की बारी आते ही पहले तो खर्च की गई राशि के आंकड़ों को देखकर फटकारना शुरू किया लेकिन वस्तुस्थिति से अवगत होते ही अधिकारियों की पीठ थपथपाने लगे। राज्य में चल रहे क्रैश बीज कार्यक्रम, बीजग्राम योजना और मिट्टी जांच अभियान की खूब तारीफ की गई। हालांकि ‘आत्मा’ की गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का निर्देश केन्द्र के अधिकारियों ने दिया तो फार्म स्कूलों की संख्या और गैर सरकारी संगठनों की भागीदारी पर असंतोष भी जताया।ड्ढr ड्ढr दो दिनों तक रांची में पूर्वी और उत्तर पूर्वी राज्यों की ‘आत्मा’ की गतिविधियों की समीक्षा बैठक में भाग लेकर लौटे बामेति के निदेशक डा. आर के सोहाने ने बताया कि बिहार अकेला राज्य है जहां 26 प्रतिशत बीज बदल दिये जाने की संभावना बढ़ गई है। राज्य के 52गांव बीजग्राम योजना से जुड़ गये हैं जिनके किसान सदस्यों की संख्या 26465 है। 5650 हेक्टेयर भूमि में बीज उत्पादन का काम शुरू किया गया है। इसके लिए सभी किसानों को आधार बीज उपलब्ध करा दिया गया है। क्रैश बीज कार्यक्रम भी राज्य में सफल हुआ है। इसके तहत लगभग चालीस हाार गांवों के 78815 किसानों को आधार बीज दिया गया है। समीक्षा के दौरान केन्द्रीय कृषि विभाग के अपर सचिव एनएल दास और संयुक्त सचिव आर के तिवारी ने राज्य पर केन्द्र के पैसे को खर्च नहीं करने की तोहमत लगाई। लेकिन जब असलियत का पता चला तो मामला उलट गया। राज्य में 23 जिलों की ‘आत्मा’ के लिए केन्द्र से राशि गत वर्ष नवंबर माह में दी गई थी। केन्द्रीय अधिकारियों ने महिलाओं की भागीदारी को तीस प्रतिशत तक ले जाने और पीपीपी सिस्टम से ‘आत्मा’ की कुल राशि का दस प्रतिशत हिस्सा खर्च करने की सलाह दी।

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