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मुख्यमंत्री आवास के सामने प्रदर्शन

हिन्दुस्तान प्रतिनिधि पटना। एक तरफ मुख्यमंत्री आवास तो दूसरी तरफ राजभवन और बीच में प्रदर्शनकारी। बुधवार की सुबह सूबे के विभिन्न हिस्सों से आए प्रदर्शनकारियों ने पटना पुलिस के होश उड़ा दिए। प्रदर्शनकारी सुबह में ही अति प्रतबिंधित क्षेत्र अणे मार्ग पहुंच गए और प्रदर्शन करने लगे। किसी को उम्मीद नहीं थी कि इतनी सुबह में राजधानी में कोई प्रदर्शन होगा और प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास तक पहुंच जाएंगे।

प्रदर्शन का आह्वान जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी, पर्चाधारी संघर्ष वाहिनी, कोसी नवनिर्माण मंच, लोक संघर्ष समिति, समाजवादी जन परिषद, परिवर्तन जन आंदोलन, दलित शक्ति संगठन व लोक संघर्ष मोर्चा आदि ने किया था। प्रदर्शनकारी करीब एक घंटे तक नारे लगाते रहे और गीत गाते रहे।

आखिरकार पुलिस ने लगभग डेढ़ सौ लोगों को हिरासत में ले लिया। इनमें से नौ लोगों को जेल भेज दिया गया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने आकर आर ब्लॉक चौराहे को जाम कर दिया।

रात से ही आने लगे थे प्रदर्शनकारीः प्रदर्शन में भाग लेने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का रात से ही आना शुरू हो गया था। आयोजक जानते थे कि दिन में उनके लिए प्रतबिंधित इलाके में घुसना संभव नहीं होगा। इसीलिए वे सुबह में ही अणे मार्ग पहुंच गए। वहां लगभग एक घंटे तक प्रदर्शनकारी जमे रहे।

सुबह छह बजे सड़कों पर सुरक्षाकर्मी व भीड़ नहीं होने के कारण उन्हें किसी ने उन्हें रोका भी नहीं। प्रदर्शनकारी बेली रोड, आर ब्लॉक और सचिवालय के रास्ते होकर अणे मार्ग पहुंचे। सुबह-सुबह प्रतिबंधित क्षेत्र में नारेबाजी का शोर सुनकर कई नेता व मंत्री आवास से बाहर निकल आए।

प्रदर्शन का नेतृत्व अरविंद अंजुम, अशोक प्रियदर्शी, पंकज, अमर राम, महेंद्र यादव, कैलाश भारती, संजय श्रीवास्तव और वर्षा जवलगेकर आदि कर रही थीं। आनन-फानन में अणे मार्ग पहुंची पुलिसमुख्यमंत्री आवास के सामने तैनात जवान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को देखकर चौंक गए।

प्रदर्शनकारियों को राजेंद्र मूर्ति के पास रोकने का प्रयास किया गया, मगर वे बढ़ते ही रहे। तब तक अणे मार्ग की खबर वायरलेस पर गूंजने लगी। देखते-देखते सचिवालय, शास्त्री नगर, हवाई अड्डा व गर्दनीबाग थाने की पुलिस पहुंच गई।

प्रदर्शन में महिलाओं की संख्या अधिक होने के कारण बीएमपी व महिला पुलिस को बुलाया गया। आधे घंटे तक नोक-झोंक के बाद पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर प्रदर्शनकारियों को हटाया। पुलिस जैसे ही उन्हें हिरासत में लेने पहुंची, प्रदर्शनकारी सड़क पर लेट गए।

आखिरकार 150 लोगों को हिरासत में लिया गया। प्रतिबंधित इलाके में घुसने के आरोप में नौ लोगों को जेल भेजा गया। अन्य को छोड़ दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने ये मांगें रखीं वनाधिकार कानून 2006 को लागू कर अन्य परंपरागत वासियों और आदिवासियों के दावे को माना जाए पर्चाधारियों को सीलिंग, भूदान, सरकारी और अन्य भूमि पर कब्जा दिलाएं दो लाख मकान बनाने और केसी के विस्थापितों के पूर्ण पुनर्वास की सीमा तय करें नदी के कटाव या अन्य करणों से विस्थापितों के एक वर्ष में पुनर्वास की गारंटी करें।

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