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वोट की कीमत : कहीं ज्यादा कहीं कम

क्या देश के हर मतदाता के मत का मूल्य एक समान होता है? हर भारतीय का संसद में बराबर प्रतिनिधित्व है? इन दोनों सवालों के जवाब ना में हैं। देश में आबादी के मुताबिक कुछ ससंदीय क्षेत्र बहुत बड़े हैं। बड़े क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों का छोटे क्षेत्रों के नागरिकों के मुकाबले संसद में कम प्रतिनिधित्व होता है। यहां हम इस बात का विश्लेषण कर रहे हैं कि किस राज्य का संसद में असंगत प्रतिनिधित्व है। इसके अलावा पुनर्सीमांकन का इन क्षेत्रों पर क्या असर पड़ा है।

2004 आम चुनाव
2007 से पहले 1970 में लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्सीमांकन हुआ था। इतने लंबे अंतराल की वजह से 2004 के आम चुनाव तक संसदीय क्षेत्रों की जनसंख्या में अहम बदलाव आ गए। उस वर्ष हुए चुनाव में प्रत्येक संसदीय क्षेत्र में औसतन 12.8 लाख मतदाता थे, हालांकि इसका यह कतई मतलब नहीं था कि हर संसदीय क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या इसके आसपास ही थी।  जैसे उस समय बाहरी दिल्ली या थाणे संसदीय क्षेत्र के मतों का मूल्य देश के मतदाता के औसत मत का एक तिहाई था। नियमों के मुताबिक कोई भी संसदीय क्षेत्र एक राज्य की सीमा से बाहर नहीं हो सकता है। इसी वजह से कुछ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के संसदीय क्षेत्र काफी छोटे थे।  जैसे 2004 में बाहरी दिल्ली में मतदाताओं की संख्या लक्षद्वीप के मतदाताओं से सौ गुनी थी। यानी लक्षद्वीप के प्रत्येक मतदाता का बाहरी दिल्ली के हर मतदाता से संसद में 100 गुना अधिक प्रतिनिधित्व था। 2004 में दिल्ली की चांदनी चौक सीट जहां छोटे संसदीय क्षेत्रों में शामिल थी, वहीं इसकी बाहरी दिल्ली सीट बड़े संसदीय क्षेत्रों में आती थी। यानी सबसे अधिक असंतुलन दिल्ली में ही था।
पुनर्सीमांकन और 2009 चुनाव
2004 में असंतुलित प्रतिनिधित्व होने के बाद भी संसदीय क्षेत्रों का पुनर्सीमांकन सही समय पर नहीं हुआ। 2001 की जनगणना के आधार पर हुए संसदीय क्षेत्रों के पुनर्सीमांकन के बाद 2009 में पहली बार इसके आधार पर पहला चुनाव हुआ। इस चुनाव में भी यह असंतुलन बरकरार रहा। सबसे  पहले 2009 में मौजूद बड़े संसदीय क्षेत्रों को देखते हैं। पुनर्सीमांकन के बाद देश के बड़े संसदीय क्षेत्र पहले से काफी छोटे हो गए, लेकिन ये सभी बड़े शहरों में ही मौजूद थे। 2009 के आम चुनाव में देश का सबसे बड़ा संसदीय क्षेत्र मल्काजगिरि था, जो कि हैदराबाद का हिस्सा है। इसके बाद के चार संसदीय क्षेत्र बेंगलुरु के आसपास के थे। हालांकि छोटे संसदीय क्षेत्रों की सूची में बहुत अधिक परिवर्तन नहीं आया है। इस सूची में अरुणाचल प्रदेश की दोनों संसदीय क्षेत्रों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि इन दोनों क्षेत्रों के कुल मतदाताओं की संख्या राष्ट्रीय औसत 13.5 लाख से काफी कम है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अरुणाचल प्रदेश के प्रत्येक मतदाता का संसद में प्रतिनिधित्व अन्य से अधिक है। ज्यादा प्रतिनिधित्व का मामला सिर्फ अरुणाचल प्रदेश का ही नहीं, बल्कि नगालैंड को छोड़ कर उन सभी राज्यों का है जहां सिर्फ एक संसदीय क्षेत्र है।
कई राज्यों में आवश्यकता से कम हैं सीटें
कुछ राज्यों में जनसंख्या के मुताबिक जितने संसदीय क्षेत्र होने चाहिए थे, वास्तविकता में उतने नहीं हैं। इसका विश्लेषण एक से अधिक संसदीय क्षेत्र वाले राज्यों के जरिये किया गया। हर राज्य में प्रत्येक संसदीय क्षेत्र के औसत मतदाताओं की तुलना राष्ट्रीय औसत मतदाताओं की संख्या (13.5 लाख) से की जाएगी। इसके बाद पता चलेगा कि किस राज्य का संसद में अधिक और किस का कम प्रतिनिधित्व है। हर राज्य की वास्तविक सीटों का भी अनुमान लगाया गया है। अगर बड़े राज्यों पर नजर डालें, जहां दस से अधिक संसदीय क्षेत्र हैं, तो हम पाएंगे कि तमिलनाडु के प्रत्येक मतदाता का संसद में प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। तमिलनाडु में फिलहाल 39 संसदीय क्षेत्र हैं, जबकि जनसंख्या के आधार पर देखें तो यहां सिर्फ 31 सीटों की आवश्यकता है। इस पैमाने पर देखें तो उत्तर प्रदेश में 80 के स्थान पर 88 और महाराष्ट्र में 48 की जगह 55 संसदीय क्षेत्र होने चाहिए।

एक से अधिक सीट वाले राज्यों में प्रत्येक संसदीय क्षेत्र के औसत मतदाता और राष्ट्रीय औसत मतदाता की तुलना करके यह देखा गया है कि किस राज्य का संसद में प्रतिनिधित्व ज्यादा है और किस का कम। इसे गुणक के जरिये दर्शाया गया है। जिन राज्यों का गुणक अधिक है, उनका संसद में प्रतिनिधित्व ज्यादा है। इसके अलावा वर्तमान सीट और अनुमानित सीटों की संख्या भी दी गई है।

राज्य    मतदाता प्रति सीट    गुणक            सीट          अनुमानित सीट
अरुणाचल प्रदेश    3,01,173    4.38        2                       1    
गोवा    5,10,397    2.59        2        1
मेघालय    6,38,870    2.07        2        1    
मणिपुर    8,67,990    1.52        2        1
त्रिपुरा    10,41,264    1.27        2        2
तमिलनाडु    10,66,883    1.24                                  39        31
जम्मू-कश्मीर    10,95,520    1.21                                                     6        5
केरल    10,93,273    1.21                                                                   20        17
हिमाचल प्रदेश    11,51,669    1.15                                                                 4        3
उत्तराखंड    11,75,934    1.12                                                                  5        4
हरियाणा    12,08,788    1.09                                                                 10        9
असम    12,47,869    1.06                                                                 14        13
पश्चिम बंगाल    12,46,379    1.06                                              42        40
झारखंड    12,74,524    1.04                                                          14        13
ओडिसा    12,94,994    1.02                                                         21        21
पंजाब    13,04,486    1.02                                                             13        13
मध्य प्रदेश    13,13,242    1.01                                                  29        29
बिहार    13,62,295    0.97                                                  40        41
आंध्र प्रदेश    13,56,487    0.97                                                               42        43
छत्तीसगढ़    14,06,558    0.94                                                       11        12
गुजरात    14,03,241    0.94                                                         26        28
उत्तर प्रदेश    14,50,414    0.91                                                             80        88
राजस्थान    14,82,400    0.89                                                       25        28
कर्नाटक    14,87,646    0.89                                                   28        31
महाराष्ट्र    15,19,336    0.87                                                         48        55
दिल्ली    15,85,370    0.83                                                              7        8


स्थिर किये गए संसदीय क्षेत्र
1970 में हुए पुनर्सीमांकन के बाद राज्यों के संसदीय क्षेत्रों की संख्या को स्थिर कर दिया गया। तर्क यह था कि जो राज्य जनसंख्या नियंत्रण में आगे रहेंगे, उनके संसदीय क्षेत्रों को कम करके उन्हें दंडित नहीं किया जा सकता। जब सीटों की संख्या को स्थिर किया गया तो इसका ध्यान नहीं रखा गया कि राज्यों की जनसंख्या अन्य राज्यों से आने वाले लोगों के कारण भी बढ़ती है।
सबसे कम प्रतिनिधित्व वाले राज्य
देश में जिन राज्यों के मतदाताओं का प्रतिनिधित्व संसद में कम है, उनमें दिल्ली, महाराष्ट्र और कर्नाटक सबसे आगे हैं। इन राज्यों में देश के सबसे बड़े तीन शहर आते हैं और इनकी जनसंख्या बढ़ने का सबसे बड़ा कारण अन्य राज्यों से आने वाले लोग ही हैं।
बड़ा असंतुलन
संसदीय क्षेत्रों का पुनर्सीमांकन 2001 की जनगणना के आधार पर किया गया था। पुनर्सीमांकन के बाद पहला आम चुनाव 2009 में हुआ। 2001 से 2009 तक देश की काफी जनसंख्या बढ़ गई, जिसकी वजह से असंतुलन सही नहीं हुआ।

शहरीकरण की हदें

2004 में असंतुलित प्रतिनिधित्व होने के बाद भी संसदीय क्षेत्रों का पुनर्सीमांकन सही समय पर नहीं हुआ। 2001 की जनगणना के आधार पर हुए संसदीय क्षेत्रों के पुनर्सीमांकन के बाद 2009 में पहली बार इसके आधार पर पहला चुनाव हुआ। इस चुनाव में भी यह असंतुलन बरकरार रहा।
2009 आम चुनाव

बड़े संसदीय क्षेत्र
संसदीय क्षेत्र     राज्य     मतदाता    मत डालने वाले     प्रतिशत
मल्काजगिरि     आंध्र प्रदेश    23,43,181    12,05,714    51 बेंगलुरु उत्तर     कर्नाटक    21,44,091    10,01,657        47 बेंगलुरु दक्षिण    कर्नाटक    20,34,910    9,08,590        45 बेंगलुरु ग्रामीण    कर्नाटक    19,04,135    11,02,833        58 बेंगलुरु सेंट्रल     कर्नाटक    19,01,055    8,46,982        45 गाजियाबाद    उत्तर प्रदेश    18,31,688    8,29,823        45 उन्नाव    उत्तर प्रदेश    18,18,980    9,04,542        50   पुणे    महाराष्ट्र    18,06,953    7,34,641        41 उत्तर-पश्चिम दिल्ली    दिल्ली    17,98,128    8,57,543        48  थाणे    महाराष्ट्र    17,96,681    7,49,873        42
छोटे संसदीय क्षेत्र
संसदीय क्षेत्र     राज्य     मतदाता    मत डालने वाले     प्रतिशत
चंडीगढ़    चंडीगढ़    5,25,437    3,43,557        65
तूरा    मेघालय    5,05,774    3,42,187        68
उत्तर गोवा    गोवा    4,86,983    2,92,295        60
अरुणाचल पश्चिम    अरुणाचल प्रदेश    4,31,332    2,85,710        66
अरुणाचल पूर्व    अरुणाचल प्रदेश     3,01,173    2,14,932        71
सिक्किम    सिक्किम    3,00,584    2,51,751        84
अंडमान निकोबार    अंडमान निकोबार    2,65,110    1,70,103        64
दादर नागर हवेली    दादर नागर हवेली    1,54,212    1,10,363        72
लद्दाख    जम्मू-कश्मीर    1,52,491    1,09,536        72
दमन दीव    दमन दीव    95,382    68,024        71
लक्षदीप    लक्षदीप    45,983    39,498        86

2004 आम चुनाव

बड़े संसदीय क्षेत्र
संसदीय क्षेत्र     राज्य     मतदाता    मत डालने वाले     प्रतिशत
बाहरी दिल्ली    दिल्ली    33,68,399     15,53,849    46
थाणे    महाराष्ट्र    32,20,196    13,13,252    41
कनकपुरा    कर्नाटक    27,00,201    15,52,621    58
पूर्वी दिल्ली    दिल्ली    26,06,789    11,90,814    46
मुंबई पूर्व    महाराष्ट्र    23,77,866    11,19,342    47
सूरत    गुजरात    23,77,198    8,96,276    38
बेंगलुरु पूर्व    कर्नाटक    21,33,579    11,57,236    54
गांधीनगर    गुजरात    21,26,829    8,45,576    40
मद्रास पूर्व    तमिलनाडु    20,00,866    9,15,865    46
मुंबई पूवरेत्तर     महाराष्ट्र    19,74,560    9,25,659    47
छोटे संसदीय क्षेत्र
संसदीय क्षेत्र     राज्य     मतदाता    मत डालने वाले     प्रतिशत
पणजी    गोवा    4,25,663    2,54,819    60
अरुणाचल पश्चिम    अरुणाचल प्रदेश     3,94,413    2,21,554        56
चांदनी चौक    दिल्ली    3,37,462    1,79,003        53
अरुणाचल पूर्व    अरुणाचल प्रदेश    2,89,606     1,63,374        56
सिक्किम    सिक्किम     2,81,937    2,19,648        78
अंडमान निकोबार    अंडमान निकोबार    2,41,645    1,53,825        64
लद्दाख    जम्मू-कश्मीर    1,75,768    1,28,931        73
दादर नागर हवेली    दादर नागर हवेली    1,22,681    84,703        69
दमन-दीव    दमन-दीव    79,232    55,591        70
लक्षद्वीप    लक्षदीप    39,033    31,820        82

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