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बिछ गई बिसात, मोहरे अभी बाकी

 हाथरस। कार्यालय संवाददाता। लोक सभा के आम चुनाव के लिए दुंदभी बज गई है। भारत निर्वाचन आयोग ने चुनावी कार्यक्रम घोषित कर चुनावी बिसात बिछा दी है, लेकिन इस चुनाव में हाथरस (सुरक्षित) लोक सभा सीट पर सभी मोहरें नहीं सज पाए हैं। दो प्रमुख राजनीतिक दलों ने ही अपने पत्ते खोले हैं। बाकी के पत्ते अभी गड्डियों में ही कैद हैं। इस लोक सभा सीट पर पांच विधानसभा क्षेत्र हाथरस, सादाबाद, सिकंदराराऊ, इगलास और छर्रा को मिलाकर चुनाव होना है।

इनमें से इगलास और छर्रा पड़ोसी जिले अलीगढ़ के अन्तर्गत आने वाली विधानसभा सीटें हैं। हाथरस और सिकंदराराऊ सीट पर बसपा का कब्जा है। सिकंदराराऊ में पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय विधायक हैं। हाथरस सीट पर गेंदालाल चौधरी विधायक हैं। सादाबाद में सपा के देवेन्द्र अग्रवाल व छर्रा पर भी सपा के राकेश सिंह का कब्जा है। इगलास सीट से रालोद के त्रिलोकी राम दविाकर विधायक हैं। हाथरस लोक सभा सीट पर वर्ष 2009 के आम चुनाव में भाजपा व रालोद गठबंधन से रालोद की सारिका सिंह सांसद चुनी गईं थीं।

सारिका सिंह को लगभग दो लाख 48 हजार वोट मिले थे। उनके निकटतम प्रतिद्वंदी बसपा के राजेन्द्र कुमार को करीब दो लाख 11 हजार मत मिले। सपा के अनार सिंह दविाकर करीब एक लाख 15 हजार वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस के प्रत्याशी प्रदीप चंदेल को महज 57 हजार वोट पाकर चौथा स्थान पाया। इस बार परिस्थितियां एकदम बदल गई हैं। मौजूदा सांसद ने पाला व क्षेत्र दोनों बदल दिए हैं। फिलवक्त वे आगरा से सपा की टिकट पर संसद की तैयारी कर रही हैं।

उधर, इस बार के चुनाव में रालोद का भाजपा से गठबंधन नहीं हुआ है। इस बार रालोद कांग्रेस के साथ जुगलबंदी कर चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। बावजूद इसके प्रबल संभावना ये है कि कांग्रेस रालोद गठबंधन भी हुआ तब भी ये सीट रालोद के खाते में जा सकती है।

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