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फेल हो रहा है टीम इंडिया का मिशन वर्ल्ड कप

इतिहास रोमांच को याद नहीं रखता, वह नतीजे याद रखता है, और नतीजा यह है कि भारतीय टीम एशिया कप से भी बाहर हो गई है। यह नौबत उन एशियाई पिचों पर आई है, जहां उसे दबंग माना जाता है। पिछले साल दक्षिण अफ्रीका और इस साल की शुरुआत में न्यूजीलैंड से बुरी तरह पिटने के बाद यह पराजय और ज्यादा कचोट रही है। विश्व कप शुरू होने में अब सिर्फ 11 महीने का वक्त रह गया है। इस बार विश्व कप ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की तेज पिचों पर खेला जाना है। जो भारतीय टीम एशियाई पिचों पर नाकाम हो रही है, वह ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में कोई चमत्कार कर देगी, यह सोचना भी खयाली पुलाव पकाने जैसा है। 

यह वही भारतीय टीम है, जो 2011 में वर्ल्ड चैंपियन बनी थी। उसके बाद से लगातार यह कहा जा रहा था कि टेस्ट क्रिकेट में भले ही भारतीय टीम कमजोर दिख रही हो, लेकिन वनडे फॉर्मेट में उसे चुनौती देना अब किसी के वश की बात नहीं है। टीम मैनेजमेंट ने साल 2011 के बाद से ही 2015 की तैयारियों की बात कही थी। जून 2013 में जब टीम इंडिया ने इंग्लैंड में चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीता, तो यह लगा भी कि तैयारियां सही चल रही हैं। लेकिन जून 2013 के बाद से यानी पिछले करीब आठ महीने से भारतीय टीम की हालत बद से बदतर होती जा रही है।

2013 के आखिर में दक्षिण अफ्रीका से भारत की हार का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह अब तक जारी है। अप्रैल 2011 में जब भारतीय टीम ने विश्व कप का खिताब जीता था, उसके पहले ठीक एक साल के दौरान खेले गए 33 मैचों में भारतीय टीम ने 22 मैच जीते थे, जबकि इस समय पिछले एक साल में टीम इंडिया ने 35 एकदिवसीय मैचों में से सिर्फ 19 मैचों में जीत हासिल की है। 

क्या इससे बाहर निकलने का कोई रास्ता है? इसके पीछे काफी हद तक महेंद्र सिंह धौनी की कप्तानी में आया बदलाव है। सुनील गावस्कर, मोहिंदर अमरनाथ से लेकर तमाम दिग्गज यह कह चुके हैं कि धौनी पहले के मुकाबले ज्यादा रक्षात्मक कप्तान हो गए हैं। इसके अलावा, टीम के चयन में भी गड़बड़ियां हुई हैं।

कुछ खिलाड़ियों को जरूरत से ज्यादा मौके दिए गए हैं, जबकि कुछ को बेवजह टीम से बाहर रखा जा रहा है। सलामी जोड़ी को लेकर किया गया ‘एक्सपेरीमेंट’ भी गलत साबित हो रहा है। रोहित शर्मा और शिखर धवन की जोड़ी अलग-अलग मैचों में अलग-अलग रन तो बना ले रही है, लेकिन एक जोड़ी के तौर पर टीम इंडिया को अच्छी शुरुआत नहीं दिला पा रही है।

फील्डिंग का स्तर अचानक गिरता दिख रहा है। कप्तान धौनी को जरूरत से ज्यादा नौजवानों की बजाय टीम के संतुलन पर ध्यान देना होगा। सिर्फ आईपीएल में प्रदर्शन की फिक्र को छोड़ना होगा। इन सारी बातों को तुरंत करना होगा, क्योंकि वक्त अब बहुत कम है। (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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