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कब थमेंगे हम

यह विचित्र स्थिति है कि हमारे देश की मुख्यधारा की अनेक दबंग जातियां अपने लिए आरक्षण की और हाशिये पर पड़ी जनजातियां अपने लिए सुरक्षा की मांग करती हैं। दबंगों की आवाज तो वोट बैंक की खातिर सुन ली जाती है, परंतु असंगठित जनजातियों को सुरक्षा नहीं मिलती, बल्कि जल-जंगल और जमीन पर से उनका हक छीन लिया जाता है।

बीते दिनों पूवरेत्तर के लोगों की पीड़ा दिल्ली-एनसीआर में अनसुनी रह गई। सचमुच जरूरी है कि नस्ल-भेद के खिलाफ एक ठोस कानून बने। चूंकि शिकार-शिकारी का घिनौना खेल महानगरों में खेला जाता है और वहां सड़क पर चलते आम आदमी की पहचान नस्ल से होती है, इसलिए जरूरी है कि नस्ल-भेद को रोका जाए। यह आवश्यक है कि कंपोजिट कल्चर वाले शहरों में पुलिस और प्रशासनिक विभागों में पूर्वोत्तर के कर्मचारी मौजूद हों, ताकि सभी वर्गो का समान रूप से खयाल रखा जाए।
भारत भरतवंशी
पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड

बलिदान का बहाना
विदेशी चंदे से चल रही आम आदमी पार्टी दिल्ली की सत्ता में आई, लेकिन टिकी नहीं, क्योंकि पार्टी के कर्ताधर्ता जल्दी में हैं। उन्हें एक राज्य नहीं, पूरा देश चाहिए। आप के लोग अमेरिकी कंपनियों के इशारे पर देश में सामाजिक क्रांति लाना चाहते हैं। इसलिए दिल्ली की जिम्मेदारियों से वे भाग गए और सांविधानिक दायित्वों की भी परवाह न की।

कई बार आप के नेताओं का आचरण अभद्रतापूर्ण रहा। सबसे बड़ी बात यह है कि पार्टी के संयोजक अरविंद केजरील में सब्र नहीं है। यदि आप को जन-लोकपाल विधेयक पास कराना होता, तो वह भाजपा से समर्थन मांग सकती थी। भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कानून की मांग भाजपा भी करती रही है। इसी तरह, जनता की भलाई के नाम पर कांग्रेस से भी हाथ मिलाया जा सकता है। लेकिन नहीं, पार्टी के आका तो अमेरिकी मंशा पूरी करने के लिए केंद्र की सत्ता चाहते हैं। इसलिए बलिदान का बहाना बनाने के लिए जन-लोकपाल विधेयक को चुना।
आनंद गोयल
स्टेट बैंक कॉलोनी, दिल्ली-9

सीधा-सादा पेड़ हूं
एक पैर पर खड़ा हुआ/अविचल, अडिग, अड़ा हुआ/ मत समझो तुम बगुला मुझको/ अपना सब न्यौछावर तुमको/ अपना कोई महल, न घर/ लगता है न मुझको डर/ मेरे आंगन में सबका स्वागत/ खग, मृग, पंथी हैं शरणागत्/ मौन सदा मैं रहता हूं/ सर्दी-गरमी सहता हूं/ न राजा, न देव हूं मैं/ सीधा-सादा पेड़ हूं मैं।
सूरजपाल चौहान
सेक्टर-20, नोएडा

प्रदेश में अराजकता
उत्तर प्रदेश की सपा सरकार के आने के पीछे एक ही कारण था, बसपा के राज से छुटकारा। उस समय काफी भ्रष्टाचार हुए और लोकतंत्र का अपमान भी हुआ। परंतु सपा सरकार ने भी जनता की उम्मीदों को छला है। युवा मुख्यमंत्री के शासन में उनके अपने ही कार्यकर्ता बेलगाम हो गए, जिनके चलते राज्य में गुंडागर्दी बढ़ी है। स्थिति यह है कि अधिकतर अपराधों के तार किसी न किसी रूप में सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़ते हैं। जनता नाहक ही पुलिस को दोष देती है, अगर सत्ता ही निरंकुश हो जाए, तो प्रशासन क्या करेगा? क्या भारत जैसे देश और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में सत्ता का असली मतलब यही है? सत्ता नशा का नाम नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का नाम है।
शिवम भट्ट, लखीमपुर, उत्तर प्रदेश

व्यक्ति नहीं, पार्टी
कांग्रेस के एक नेता ने भाजपा को वन मैन पार्टी कहा है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने इस पर अपनी सहमति जताई है। जब से मोदी का उदय हुआ है, यह नेता नाराज चल रहे हैं। पर यह समझना चाहिए कि पार्टी व्यक्ति-विशेष से नहीं चलती, बल्कि सामूहिक फैसलों से चलती है। ऐसे में, भाजपा वन मैन पार्टी कैसे है? यहां तो कई वर्षो तक एक व्यक्ति, एक पद की नीति रही है। फिर भी यदि भाजपा वन मैन पार्टी है, तो सभी पार्टियों पर यह आरोप लग सकता है।
शकुंतला महेश नेनावा, इंदौर

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