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सांस्कृतिक धरोहर पर हाथ साफ कर रहे चोर

नई दिल्ली। जितेंद्र भारद्वाज।  केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय एक ओर ऐतिहासिक धरोहरों को उनके पुरातन स्वरूप में दुनिया के सामने रखने के लिए गूगल के साथ एक योजना पर काम कर रहा है, वहीं दूसरी और इन धरोहरों को चोर ले जा रहे हैं।

फिर भी इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। पिछले तीन सालों में ऐतिहासिक स्थलों से मूर्तियां, बर्तन, दरवाजे, ईंट-पत्थर एवं दूसरी कलाकृतियां चोरी होने के 2223 मामले सामने आए हैं। चोरी हुए सामान की कीमत करीब नौ हजार 472 करोड़ रुपये आंकी गई है। गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश के सभी राज्यों में प्राचीन काल की सांस्कृतिक धरोहर वाले स्थानों पर चोर सेंध लगा रहे हैं। फाइलों में भले ही इन स्थानों पर निजी सुरक्षा गार्ड, राज्य पुलिस और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवानों की तैनाती मिलती है, लेकिन जिस तरह से चोर सांस्कृतिक विरासत पर हाथ साफ कर रहे हैं, उससे भारतीय पुरातत्व विभाग (एएसआई) और दूसरी एजेंसियों की घोर लापरवाही का खुलासा होता है।

खास बात यह है कि चोरी की ज्यादातर वारदात दिन के समय ही अंजाम दी गईं। दिल्ली में भी सक्रिय हैं चोर :चोरों का निशाना बने ऐतिहासिक स्थलों में दिल्ली की भी कई सांस्कृतिक धरोहर शामिल हैं। इनमें हुमायूं का मकबरा, कुतुब मीनार और निजामुद्दीन क्षेत्र में स्थित इस्लामिक काल की अहम इमारत लाल महल भी शामिल हैं। यहां पर तो इमारतों के ढांचे में ही सेंध लगाने की घटनाएं सामने आई हैं। समिति ने भी जताई थी गहरी चिंता :राष्ट्रीय विरासत स्थल आयोग अधिनियम-2009 के तहत गठित समिति ने भी सांस्कृतिक स्थलों पर गहरी चिंता जताई थी।

150 पन्नों की रिपोर्ट में खासतौर से लाल महल के संरक्षण को लेकर अपनी सिफारशिें दी गई हैं। राष्ट्रीय इमारत घोषित होने के बाद भी एएसआई अभी तक यहां से अतिक्रमण नहीं हटा पाया है। कई बार इस इमारत को तोड़ने के भी प्रयास किए गए। खुद संस्कृति मंत्रालय ने भी इस बात को माना है। इन स्थलों के संरक्षण के लिए जिम्मेदार एजेंसियों का दावा है कि उन्होंने चोरी हुए सामान में से छह हजार करोड़ की संपत्ति बरामद कर ली है।

यह अलग बात है कि जो सामान बरामद हुए हैं, उसे चोरों ने कहीं पर इस्तेमाल करने लायक ही नहीं छोड़ा है। यूं लग रही है सुरक्षा में सेंध :समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एएसआई में कर्मचारियों की कमी, उनके पास कानूनी अधिकार न होना और संसाधनों की कमी की वजह से पुरातत्व इमारतों का संरक्षण नहीं हो पा रहा है। समिति ने बताया कि संसाधनों की कमी से जूझ रहा एएसआई अभी तक सिर्फ 3675 प्राचीन इमारतों के संरक्षण को लेकर काम कर पाया है, जबकि देश में ऐसी इमारतों की संख्या दो लाख से भी अधिक है।

कई मामले ऐसे भी देखने को मिले हैं, जिनमें सांस्कृतिक विरासत को देश से बाहर ले जाने का प्रयास भी हुआ है। इसी के मद्देनजर गृह मंत्रालय ने एएसआई, सीबीआई और कस्टम अथॉरिटी को आपस में सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान करने के लिए हिदायतें जारी की हैं। तीन वर्षो के दौरान हुई चोरी की घटनाएं :महाराष्ट्र-123 मामले, पश्चिम बंगाल-406, आंध्रप्रदेश-377, कर्नाटक-98, राजस्थान-140, असम-179, मध्यप्रदेश-163, बिहार-190, यूपी-38, झारखंड-143, हरियाणा-24, दिल्ली-14 एवं हिमाचल प्रदेश-112ं।

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