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महंगाई पर सरकार ने हाथ खड़े किये

बेतहाशा बढ़ती कीमतों और इस पर लगाम कसन की सरकार की कवायदां क बीच याजना आयाग क उपाध्यक्ष मांटक सिंह अहलुवालिया न कहा है कि महंगाई राकन के लिए सरकार क पास काई जादुई छड़ी नहीं है। महंगाई क मुद्दे पर संप्रग सरकार का बचाव करत हुए उन्हांन कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार मं कच्च तल क दाम यूं ही बढ़त रह ता उपभाक्ताआं को महंगाई की मार झलनी ही पड़गी। उन्होंने यह भी कहा कि कच्चे तेल की कीमतें यदि आने वाले समय में और बढ़ती हैं ता कार चलाने वालों विशेषकर लक्जरी कार चलाने वालों को पेट्रोल और डीजल पर अधिक खर्च करन के लिए तैयार रहना चाहिए।ड्ढr ड्ढr हालांकि उन्होंने कहा कि सरकार महंगाई की इस मार स गरीब तबक का दूर रखन का पूरा प्रयास कर रही है। एक निजी टीवी चैनल का दिए साक्षात्कार में उन्होंने रविवार को कहा कि एसा नहीं है कि सरकार महंगाई का काबू मं करन की काशिश नहीं कर रही लकिन दुनिया भर मं बढ़ रही महंगाई, खाद्यान्न संकट और तल की कीमतां मं उछाल क कारण सरकार क उपायां का मुद्रास्फीति दर पर काई असर नहीं पड़ रहा है। उन्हांन कहा कि मौजूदा परिस्थितियां मं हमं यह कहन मं काई संकाच नहीं हाना चाहिए कि महंगाई का कम करन क लिए सरकार क पास काई जादुई छड़ी नहीं है। यदि तेल का आयात मूल्य बढ़ता है तो हम अनिश्चितकाल तक घरेलू ग्राहकों को इससे बचाकर अलग नहीं रख सकते। अहलूवालिया न कहा कि हाल की बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि यदि तेल की कीमतें और चढ़ती हैं तो जनता को भी और अधिक मूल्य देन के लिए तैयार रहना होगा। गरीबों को बचान की बात तो समझ आती है। लकिन धनी लोगों को बचाकर रखन का काफी कमजोर मामला बनता है। इसलिए सच्चाई यह है कि यदि तेल की कीमतें बढ़ती रहीं तो सरकार को कुछ न कुछ करना होगा। अहलूवालिया न कहा कि योजना आयोग ने लगातार कहा है कि ग्राहकों को भुगतान करना ही चाहिए और सब्सिडी सीमित होनी चाहिए। यह पूछने पर कि इस सोच पर केन्द्रीय मंत्रिमंडल में क्या आम सहमति है, अहलूवालिया न कहा- कैबिनेट का फैसला बोझ को बांटने के बारे में है। उन्होंने विश्वास जताया कि मुद्रास्फीति की दर आने वाले तीन महीनों में नीचे आएगी।ड्ढr ड्ढr उल्लेखनीय है कि पिछल कुछ सप्ताह स महंगाई लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। सरकार न महंगाई पर काबू पान क लिए अप्रैल क पहल सप्ताह मं शुरुआती कदम उठाए थ। स्टील का निर्यात बंद कर दिया गया वहीं, दालां मं वायदा काराबार पर राक लगाई गई है। गैर बासमती चावल निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। दूसरी आर खाद्य तलां की कीमतां पर अंकुश लगान क लिए भी इस पर आयात शुल्क समाप्त करन का भी फैसला किया गया। जानकारां की मान ता आन वाल दिनां मं महंगाई और भी खतरनाक स्तर पर पहुंच सकती है।

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