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हमारा काम रिंग में पसीना बहाना है: अखिल

हमारा काम रिंग में पसीना बहाना है: अखिल

पूर्व राष्ट्रमंडल खेल स्वर्ण विजेता और ओलंपियन मुक्केबाज अखिल कुमार का कहना है कि उनका काम रिंग में पसीना बहाना है और मुक्केबाजी महासंघ के मामले को देखना प्रशासकों का काम है।
       
पटियाला में प्रशिक्षण में जुटे हुए अखिल ने भारतीय मुक्केबाजी संघ की मान्यता समाप्त करने के अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी महासंघ के फैसले पर फोन पर कहा कि देखिए! मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि मुक्केबाज अपने काम में हुटे हुए हैं, प्रशिक्षण कर रहे हैं और रिंग में अपना खून-पसीना बहा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय महासंघ के फैसले के बाद भारतीय अधिकारियों को यह देखना होगा कि जल्द से जल्द यह मामला समाप्त हो।
       
मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों 2006 के स्वर्ण विजेता और 2007 की एशियाई चैम्पियनशिप के कांस्य विजेता अखिल ने कहा कि भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और खेल मंत्नालय हमारी पूरी मदद कर रहे हैं। शिविर लगा रहे हैं जिसके लिए हम उनका धन्यवाद करते हैं। खिलाड़ियों का ऐसे मामलों पर टिप्पणी करने का कोई औचित्य नहीं बनता है क्योंकि उनका काम खेलना और देश के लिए अच्छा प्रदर्शन करना है।
       
अखिल ने साथ ही कहा कि मैं इस बात को मानता हूं कि ऐसे फैसलों का मुक्केबाजों पर कहीं न कहीं मनोवैज्ञानिक दबाव बनता है कि वह तिरंगे के तले नहीं खेल पाते हैं और जीतने पर राष्ट्रगान नहीं सुन पाते हैं। लेकिन यह भी देखा जाना चाहिए कि कोई काम थमा नहीं है।
       
उन्होंने कहा कि फर्क इतना है कि पहले निलंबन था और अबमान्यता समाप्त कर दी गयी है लेकिन कोच और खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय महासंघ के झंड़े तले प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना जारी रखेंगे। हां, यह जरूर है कि ऐसे कदमों से प्रायोजक दूर हो सकते हैं।
       
अखिल ने कहा कि इस वर्ष मेरा लक्ष्य राष्ट्रमंडल और एशियाई खेल हैं जिसके लिए मैं अपनी तैयारियों में जुटा हुआ हूं। मैं अभी अभी आज की ट्रेनिंग पूरी कर लौटा हूं। मैं फिर स्पष्ट करना चाहता हूं कि हमारा काम ऐसी बातों पर ध्यान देना नहीं बल्कि रिंग में अभ्यास में पसीना बहाना है।

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