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महिला अपराध के मामले बढ़े, सजा सिर्फ 19 फीसदी को

राजधानी में महिला अपराध की घटनाओं में खासतौर से दुष्कर्म की वारदातों में बेतहाशा बढ़ोतरी दर्ज की गई। इन आंकड़ों में चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले तीन सालों में ऐसे मामलों के आरोपियों को सजा तक पहुंचाने का प्रतिशत 20 फीसदी के आंकड़े को भी नहीं छू सका।

मतलब यह कि महिला अपराध को लेकर किए जा रहे तमाम सुधारों, प्रयोगों व कड़ाई के दावे तो किए गए लेकिन सजा तक पहुंचाने की प्रक्रिया में कहीं न कहीं कमी जरूर रह गई।

हालांकि इसके कई ऐसे कारण हैं जिनमें मामला दर्ज करने वाली पीडिता या तो पीछे हट गई या फिर उसने समझौता कर लिया या फिर मामला जांच में झूठा भी निकला। लेकिन ऐसे मामलों का प्रतिशत इतना नहीं है कि आरोपियों को सजा तक पहुंचाने के प्रतिशत में इतनी कमी देखी जाए।

हां पुलिस के विरोध में जो तथ्य सामने आता है, वह यह कि अक्सर यह पुलिस पर यह आरोप लगते हैं कि जांच के दौरान कुछ न कुछ कमी जरूर रह गई। कहीं घटनाक्रम की कडियों को जोड़ने में तो कहीं साक्ष्य जुटाने में पुलिस कमजोर रहीं।

छेड़छाड़ में और भी कम सजा: वैसे भी यह आंकड़ा सिर्फ दुष्कर्म के मामलों तक ही सीमित नहीं है। छेड़छाड़ की बात करें तो इसके आरोपियों को सजा तक पहुंचाने का प्रतिशत भी चौंकाने वाला है। ऐसे आरोपियों की संख्या छह फीसदी से भी कम है, जबकि महिलाओं पर फब्ती कसने, उनका पीछा करने या अन्य तरीकों से परेशान करने की घटनाओं के आरोपियों के लिए यह आंकड़ा साढ़े छह फीसदी का है।

रिपोर्ट में हुआ खुलासा: यह खुलासा राजधानी में 2011 से लेकर 2013 के बीच महिला अपराधों को लेकर दर्ज किए गए मामलों में हुई सजा को लेकर तैयार की गई एक रिपोर्ट में हुआ है। खास बात यह है कि दिल्ली पुलिस के आंकड़ों में इन तीन सालों में महिला अपराध में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

बारीकी से हो विश्लेषण: विशेषज्ञों का कहना है कि महिला अपराध के जिन मामलों में आरोपियों को सजा तक पहुंचाने में पुलिस असफल रही, उसके लिए एक ऐसी यूनिट तैयार करनी चाहिए जो इन मामलों का बारीकी से विश्लेषण करे और यह तय करे कि कहां चूक रह गई और भविष्य में इस तरह की चूक से कैसे निपटा जाए। जब तक ऐसी विशेष टीम नहीं बनेगी ऐसे मामालों में बढ़ोतरी होती रहेगी।

हेल्पलाइन पर भी बढ़े मामले
राजधानी में होने वाले महिला अपराध को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने कई हेल्पलाइन नंबर पर  भी शुरू किए हैं। इन नंबरों पर भी महिलाओ द्वारा शिकायत करने के मामले भी बढ़े हैं। एंटी स्टॉकिंग एवं एंटी ऑबसीन के मामले 1091 पर दर्ज करा सकते हैं।

महिला अपराध के मामले
 2013        2012        2011
  दुष्कर्म     1559         706         453
  छेड़छाड़  556           639       3347

सजा पाने वाले आरोपियों की संख्या
 2013        2012        2011
  दुष्कर्म  150  158          207
  छेड़छाड़  27    25         27

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