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सरकार के पास 5253 करोड़ रुपये का हिसाब नहीं

सरकार के पास 5253 करोड़ रुपये का हिसाब नहीं

रांची। हिन्दुस्तान ब्यूरो। राज्य सरकार के पास पिछले 13 वर्षों में विभिन्न योजनाओं पर किये गए खर्च के तहत 5253 करोड़ रुपये का हिसाब नहीं है। यह खुलासा महालेखाकार की वित्त वर्ष 2012-13 की ऑडिट रिपोर्ट में किया गया है। यह रिपोर्ट मंगलवार को विधानसभा के पटल पर रखी गयी। बाद में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए झारखंड की प्रधान महालेखाकार मृदुला सप्रु ने कहा कि ऑडिट रिपोर्ट में जो गड़बिड़यां या अनियमितताएं दर्ज की जाती हैं, उसके सुधारने के प्रति राज्य सरकार गंभीर नहीं है।

यह भी कहा कि जिलों में जो वित्तीय अनियमितताएं मिलती हैं, उनको ठीक कराने की जवाबदेही उपायुक्त नहीं उठाते। साथ ही शिकायतों पर कार्रवाई भी नहीं करते। जानकारी दी कि राज्य के संस्थाओं और निकायों द्वारा 4640.48 करोड़ रुपये का उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दिया गया। इसके अलावा वर्ष 2000 से 2013 के बीच विभिन्न योजनाओं पर खर्च की गयी राशि में से 5253 करोड़ रुपये का हिसाब नहीं मिला है।

सप्रु ने कहा कि वर्ष 2012-13 के दौरान बजट आंकलन की तुलना में 7656 करोड़ रुपये कम राजस्व प्राप्त हुआ। इस दौरान 3406 करोड़ रुपये का राजकोषीय घाटा भी दर्ज किया गया। झारखंड सरकार ने सरकारी कंपिनयों, सहकारी संस्थाओं, बैंकों एवं सिमितयों आदि में 167.82 करोड़ रुपये का निवेश किया।

निवेश वापसी में औसत ब्याज दर 6.76 प्रतिशत की तुलना में कम थी। ऑडिट के दौरान 9225.13 करोड़ की बचत बजट आंकलन में गड़बड़ी के कारण हुई। प्रधान महालेखाकार ने कहा कि वर्ष 2012-13 की ऑडिट के दौरान बिक्री, व्यापार आदि पर कर, राज्य उत्पाद, भूराजस्व, वाहनों पर कर, स्टांप एवं रिजस्ट्री फीस विद्युत पर कर एवं शुल्क तथा खनन से मिलने वाले राजस्व में 1532 करोड़ रुपये की कमी पायी गयी।

विभागों ने 568.52 करोड़ रुपये का निर्धारण नहीं करने की बात स्वीकार किया है। इसमें से 7.02 करोड़ रुपये की वसूली भी की गयी है।

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