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भगवान भरोसे होते हैं ट्रेनों में रात के राहगीर

रांची। रघुनाथ झा। रात में ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह से असुरक्षित हो गया है। राज्य के सभी मंडल के क्षेत्राधिकार में आनेवाली ट्रेनों में रात को होनीवाली घटनाएं बढ़ गई हैं। सबसे ज्यादा घटना पलामू के बरवाडीह-लातेहार से डाल्टेनंगज, धनबाद-चंद्रपुरा, गोमो में हो रही हैं।

यहां रात में डकैती, छेड़छाड़ और चोरी हो रही है। इसके बावजूद रेल और राज्य पुलिस यात्रियों को सुरक्षा देने में नाकाम है। सुरक्षित रेल सफर अब जोखिमभरा होने के साथ-साथ जानलेवा भी हो चुका है।

पिछले महीने कोडरमा के पास भुवनेश्वर राजधानी में एक महिला के साथ छेड़छाड़ की घटना भी घट चुकी है। रेल अधिकारी सुरक्षाकर्मियों की कमी का रोना रोकर, इससे पल्ला झाड़ लेते हैं। नतीजन, असुरक्षा की समस्या रात में ट्रेनों के परिचालन पर प्रश्नचिन्ह लगा रही है।

रांची-दुमका एक्सप्रेस, मौर्य एक्सप्रेस, भोपाल-हावड़ा इंटरसिटी, वनांचल एक्सप्रेस जैसी गाडियों में सफर यात्रियों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। खतरनाक है राजधानी का स्टेशनरांची स्टेशन में तो दिनदहाड़े दो हत्या तक हो चुकी है।

स्टेशन में सुरक्षा को लेकर जो कदम उठाए गए है वह अभी तक धरातल पर नहीं उतर सके हैं। इस लापरवाही का खामियाजा रेल यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। कम सुरक्षाकर्मी का बहानारेलवे के सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार सभी ट्रेनों में स्कॉट देना संभव नहीं है।

इसके लिए सुरक्षाकर्मियों की भी कमी है। रात की ट्रेनों में स्कॉट दिया जाता है। आवश्यकतानुसार सुरक्षाकर्मियों के नहीं होने पर केवल पांच-छह की संख्या में ट्रेनों में स्कॉट दिया जाता है। सबसे खतरनाक पतरातू-बरवाडीह सेक्शनरेल अधिकारियों के अनुसार सबसे अधिक खतरनाक पतरातू से डालटनगंज के बीच का रेल मार्ग है।

रांची से बरकाकाना होकर जानेवाली राजधानी एक्सप्रेस और गरीब रथ भी इसी रूट से गुजरती हैं। घने जंगलों के बीच गुजरनेवाले इस सेक्शन में नक्सली गतिविधि के कारण सुरक्षा नहीं के बराबर है। कम सुरक्षाकर्मी ट्रेनों में जाते भी हैं, तो सिविल ड्रेस में या फिर नहीं भी जाते।

अपराध और उग्रवाद में अव्वल राज्य पुलिस भी यात्रियों की सुरक्षा में नजर नहीं आते। अधिकारियों के मुताबिक पलामू क्षेत्र में गुजरनेवाली ट्रेनों में चेन-पुलिंग की घटनाएं आम हैं। एक-दो किमी के दूरी पर भी ट्रेनें रोक दी जाती हैं।

ट्रेनों के एटेंडेट या सुरक्षाकर्मी दुबके रहते हैं। भगवान भरोसे ट्रेन की सुरक्षा राजधानी एक्सप्रेस कभी-कभार  गरीब रथ स्कॉट नहीं मौर्य एक्सप्रेस नहीं हटिया पटना एक्सप्रेस नहीं पाटलीपुत्रा एक्सप्रेस नहीं हटिया-हावड़ा नहीं दरभंगा-हैदराबाद नहीं रांची-जयनगर नहीं रांची-कामख्या नहीं संपर्क क्रांति नहीं यशवंतपुर एक्सप्रेस नहीं ट्रेनों में लूटपाट की घटनाएं पांच जून राजधानी एक्सप्रेस में छेड़छाड़ धनबाद 29 सितंबर गया-हावड़ा में छेड़छाड़ धनबाद 04 दिसंबर वनांचल एक्सप्रेस में चंद्रपुरा के पास 07 दिसंबर बनारस इंटरसिटी में बरकाकाना 09 दिसंबर बनांचल एक्सप्रेस कतरासगढ़ 13 दिसंबर दुमका इंटरसिटी चंद्रपुरा 18 दसिंबर भोपाल-हावड़ा पलामू 26 दिसंबर रांची-बनारस इंटर पलामू सात जनवरी रांची बनारस इंटर पलामू 16 फरवरी रांची दुमका एक्सप्रेस चंद्रपुरा तीन मार्च भोपाल-हावड़ा में डकैती बरवाडीह तीन मार्च संपर्क क्रांति मं लूटपाट रांची स्टेशन में दिन-दहाड़े हत्या भी 10 नवंबर 2013 ट्रेन में यात्री अखिलेश का समान उड़ाया गया छह दिसंबर 2013 टाटा पैसेंजर में बोरे के अंदर मिली लाश 17 जनवरी 2014 सुबह में दुमका से आए यात्री अच्यूतानंद की स्टेशन में हत्या 19 जनवरी 2014 लोहरदगा ट्रेन इटकी के आसपास एक लड़की का मोबाइल उड़ाया 16 फरवरी 2014 मौर्य एक्सप्रेस के यात्री बबलू सिंह को गोली मारी सुरक्षा और सहयोग पर सीएम से मिले डीआरएम ट्रेनों में सुरक्षा के मामले को लेकर मंडल प्रबंधक दीपक कश्यप मंगलवार को सीएम हेमंत सोरेन से मिले।

उन्होंने सीएम से रेल विकास और उसकी सुरक्षा को लेकर सहयोग मांगा। उन्होंने कि राजधानी समेत अन्य स्टेशनों में यात्री सुविधाओं और नई ट्रेनों के लिए वह प्रयासरत हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से रात में ट्रेनों और क्षेत्र के रेल खंडों पर राज्य सरकार स्थानीय स्तर पर सुरक्षा की मांग की।

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