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मायागंज अस्पताल में अटकी 5.50 करोड़ की योजना

भागलपुर। कार्यालय संवाददाता। रोगी कल्याण समिति की बैठक सालभर से नहीं हो सकी है। नतीजा, स्वीकृति नहीं मिलने की वजह से करीब साढ़े पांच करोड़ रुपए की योजना अटकी हुई है। इस कारण जरूरी उपकरणों की खरीदारी नहीं हो सकी है। निर्माण ठप है। अगर जल्दी बैठक नहीं हुई तो फिर आचार संहिता लागू होने पर अगले दो माह तक और इंतजार करना पड़ेगा।

बैठक करने के लिए प्रस्तावित एजेंडा बनाकर अस्पताल प्रशासन ने प्रमंडलीय आयुक्त को भेज दिया है। हैरानी की बात यह कि पिछले साल जनवरी में हुई बैठक की फाइल भी गायब हो चुकी है। इस कारण विकास संबंधी लिए गए निर्णयों की जानकारी भी नए अस्पताल अधीक्षक को नहीं है। जानकार बताते हैं कि तत्कालीन अस्पताल अधीक्षक डा. विनोद प्रसाद ने बैठक के लिए कोई पहल नहीं की। जबकि बैठक बुलाने के लिए आयुक्त बार-बार उन्हें समय निर्धारित करने के लिए कहते रहे।

बैठक के लिए एजेंडा में 24 बिन्दु हैं। इनमें ओपीडी में नबिंधन काउंटर को आउटसोर्स पर कंप्यूटरीकृत करना है। अस्पताल के बेसमेंट का जीर्णोद्धार, अस्पताल के पांच जेनरेटर को ऑउटसोर्स करने, ऑक्सीजन गैस पाइपलाइन चलाने के लिए दैनिक मानदेय पर कर्मचारी रखने, रेडियोलॉजी विभाग में एक्स-रे और सीटी-स्कैन करने के लिए निजी टेक्नीशियन की दर बढ़ाने, पेयजल के लिए वाटर कूलर लगाने, रैंप का निर्माण, लेक्चर हॉल का निर्माण, इमरजेंसी व ओपीडी को शेड से जोड़ने, टेम्पो स्टैंड को खाली कराने, अस्पताल के विभिन्न वार्डो में बेकार के सामानों की नीलामी और सीसीटीवी कैमरा लगाने की योजना शामिल है।

इसके अलावा हर वार्ड में जांच कॉर्नर, सीटी स्कैन और एमआरआई भवन का निर्माण के अलावा अतिक्रमणमुक्त जमीन की घेराबंदी करना है। लेकिन रोगी कल्याण समिति की बैठक नहीं होने की वजह से ये सारी योजनाएं अटकी हुई हैं। गर्मी आ गई है।

लेकिन पेयजल की व्यवस्था नहीं है। मरीज चापाकल से पानी लेते हैं। जबकि वाटर कूलर लगाने के लिए फंड पड़ा है। लेकिन समिति से स्वीकृति नहीं मिलने की वजह से उसे नहीं लगाया जा सका है। दूसरी बड़ी परेशानी यह हो रही है कि बिजली जाने के बाद जेनरेटर चलानेवाला कोई नहीं रहता है।

पांच जेनरेटर है और उसे चलाने के लिए केवल एक ऑपरेटर है। शिशु विभाग में लगे न्यू बॉर्न चाइल्ड केयर (एनबीसीसी) में नवजात शिशु की हालत बिजली जाने के बाद बिगड़ने लगती है। जेनरेटर चलाने के लिए नर्स व कर्मचारियों को ऑपरेटर को ढ़ंढना पड़ता है। इसलिए इसे भी ऑउटसोर्स पर देने की योजना है। अस्पताल के गेट के सामने की सड़क अवैध टेम्पो स्टैंड बन गया है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने उसे हटाने का निर्देश दिया था।

लेकिन उनकी कुर्सी जाते ही मामला ठंडे बस्ते में चला गया। उस पर अंतिम निर्णय रोगी कल्याण समिति को लेना था। लेकिन बैठक नहीं होने की वजह से उस दिशा में भी कोई पहल नहीं हो सकी है।

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