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तैयारी के लिए त्यागनी होगी ‘त्याग की भावना’

इलाहाबाद प्रमुख संवाददाता। पहले प्रयास में लोक सेवा आयोग की पीसीएस 2012 परीक्षा टॉप करने वाले अभिनव रंजन श्रीवास्तव कहते हैं कि प्रतियोगी छात्रों को तैयारी के लिए ‘त्याग की भावना’ छोड़नी होगी। यह भावना कतई नहीं होनी चाहिए कि पीसीएस की तैयारी कर रहे हैं तो एसएससी, बैंक या कोई अन्य भर्ती परीक्षा नहीं देंगे।

कोई नौकरी छोटी या बड़ी नहीं होती है। अगर तैयारी है तो दूसरी परीक्षाओं में भी भाग्य जरूर आजमाएं क्योंकि नौकरी मिलने के बाद आत्म वशि्वास बढ़ता है और तैयारी भी काफी प्रभावकारी हो जाती है। हां, यह जरूर है कि अंधाधुंध फार्म न भरें। वह कहते हैं कि बीटेक करने के बाद उनका चयन इन्फोसिस में हुआ था। फिर भी एसएससी की परीक्षा दी और ऑडिटर के लिए चयनित हुए। इस परीक्षा में मिली रैंक ने उनका उत्साह काफी बढ़ाया।

पीसीएस को टॉप करने में इस उत्साह की भी अहम भूमिका रही। आईएएस परीक्षा टॉप करने वाली एक महिला अभ्यर्थी भी बैंक में क्लर्क ही थीं। अभिनव ने ‘हिन्दुस्तान’ के साथ अपने अनुभव साझा किए। प्रस्तुत है उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश। सीसैट को हिन्दी पट्टी के लिए नुकसानदायक बताया जा रहा है? आप क्या मानते हैं?देखिए यह सच है कि सीसैट लागू होने के बाद हिन्दी पट्टी के छात्रों का चयन कम हुआ लेकिन सीसैट समय की मांग है।

हम ई-गवर्नेन्स की ओर बढ़ रहे हैं। वैज्ञानिक सोच का महत्व बढ़ गया है। यही वजह है कि सीसैट में गणित और विज्ञान ज्यादा है। ऐसे में सोच बदलनी होगी। सीसैट को बदलने की मांग करने के बजाए इसके अनुसार अपनी तैयारी को ढालने की आवश्यकता है। ऐसा करना मुश्किल नहीं है क्योंकि हिन्दी पट्टी के प्रतियोगी छात्रों में मेधा की कमी नहीं है। पहला प्रयास था। पीसीएस मेन्स के दो विषयों की तैयारी करने में कोई मुश्किल नहीं हुई?बिल्कुल नहीं।

मैं आईएएस परीक्षा की तैयारी भूगोल और लोक प्रशासन विषय से कर रहा हूं। लेकिन पीसीएस की तैयारी के लिए मैनें लोक प्रशासन को छोड़ समाज कार्य विषय लिया। भूगोल पर तैयारी ठीक थी, थोड़ी मेहनत समाज कार्य विषय के लिए करनी पड़ी। कोई मुश्किल नहीं हुई। सफलता के लिए कितने घंटे पढ़ाई की?आठ से दस घंटे हर रोज पढ़ाई करता हूं। सोशल नेटवर्किंग से भी जुड़ा हूं। पढ़ाई से मन ऊब जाता है तो इस नेटवर्किंग से जुड़कर मन बहला लेता हूं।

पढ़ाई को कभी बोझ की तरह नहीं लेता हूं। सिविल सर्विस में आना था तो बीटेक क्यों ?बीटेक भी अब बीए जैसा हो गया है। इसमें कोई शक नहीं है कि बीटेक में कई ऐसे व्यवहारिक ज्ञान मिलते हैं जो बीए की पढ़ाई में नहीं मिलते। मेरे चाचा पीयूष रंजन श्रीवास्तव मेरे प्रेरणास्रेत हैं। उन्होंने भी बीटेक किया था। आज वह एसपीआरए हैं। मेरे बड़े भाई भी बीटेक कर चुके हैं और आज वह पर्यटन अधिकारी हैं। एक और फायदा यह है कि बीटेक समाप्त होते ही कोई न कोई नौकरी मिल जाती है।

प्रतियोगी छात्रों के लिए आपका कोई संदेश?स्तरीय किताबों से अध्ययन करें। नकारात्मक सोच से दूर रहें। ऐसे सीनियर से बचें जो नकारात्मक बातें करते हैं। कोचिंग में भी पढ़ाई करें लेकिन उस पर पूरी तरह निर्भर कत्तई न हों। आगे क्या करने की योजना है?आईएएस परीक्षा की तैयारी कर रहा हूं। अभी मैंने यह परीक्षा नहीं दी है। मकशद आईएएस अफसर बनकर देश की सेवा करना है। मेरी सफलता में मेरे भाई कीर्तविान श्रीवास्तव और चाचा पीयूष रंजन श्रीवास्तव के साथ ही समाज शास्त्र के विशेषज्ञ पंकज मिश्र की अहम भूमिका रही।

माता-पिता और भाई-बहन का भी भरपूर सहयोग मिला।

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