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बाल स्वास्थ्य ग्रामीण योजना पर लग रहा है ग्रहण

आजमगढ़। निज संवाददाता। जिले में जोर-शोर से शुरू हुई बाल स्वास्थ्य गारण्टी योजना पर ग्रहण लग रहा है। उधार के डाक्टरों के भरोसे बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण हो रहा है। पीएचसी और सीएचसी पर डाक्टरों की कमी से यह समस्या धीरे-धीरे विकराल रूप धारण कर रही है। बच्चों को रोग मुक्त व गंभीर बीमारी को शुरुआत में ही खत्म करने के लक्ष्य के साथ शुरू की गई महत्वाकांक्षी योजना एक वर्ष के बाद भी जनपद में पटरी पर नहीं आ सकी है।

इस योजना में टीम के डाक्टर के साथ ही स्वास्थ्य कर्मी, वाहन, उपकरण आदि का स्वास्थ्य विभाग की ओर से अलग व्यवस्था करने का आदेश है। पहले चरण में प्रत्येक ब्लाक में दो-दो टीमों को बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर पेट में कीड़ा मारने व आयरन की गोलियां देनी है। सबसे पहले सरकारी विद्यालयों को सूची में रखा गया है। बीमार बच्चों को जरूरत के मुताबिक पीएचसी, सीएचसी से लेकर हायर सेंटर तक भेज कर नि:शुल्क उपचार की व्यवस्था है।

प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने फरवरी 2013 में ही इस योजना का उद्घाटन किया था। योजना के चालू होते ही प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर दो-दो टीम को लगाया गया था। इस प्रकार से जिले में कुल 52 टीमें लगाई गई थी। इधर जिले में स्वास्थ्य केंद्रों पर डाक्टरों की चल रही कमी के चलते इस योजना पर ग्रहण लगने लगा है। कई स्वास्थ्य केंद्रों पर गठित एक भी टीम में डाक्टर नहीं हैं। इतना ही नही इस टीम के लिए अलग से वाहन की भी व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी।

पीएचसी से उधार में चिकित्सक व गाड़ी लेकर स्वास्थ्य परीक्षण का कार्य कर रहे हैं। योजना के नोडल अधिकारी डा.परवेज अहमद के अनुसार प्रत्येक ब्लाक पर दो-दो टीमें अपना कार्य कर रही हैं। कुछ कमियां है लेकिन सब कुछ व्यवस्था ठीक हो जाएगी।

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