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दुष्कर्म पीड़िताओं की नहीं होगी अमानवीय जांच

दुष्कर्म पीड़ितओं की मानसिक पीड़ा को समझते हुए सरकार ने इलाज और जांच के लिए नए दिशा निर्देश जारी किए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने रेप पीड़िताओं की अमानवीय जांच (टू फिंगर टेस्ट) पर रोक लगा दी है। नए दिशा निर्देश के अनुसार इस तरह की जांच को गैर-कानूनी करार दिया गया है।

मानसिक पीड़ा पर लगेगी रोक: नए नियमों के अनुसार अस्पतालों को पीड़ितओं की फॉरेंसिक और मेडिकल जांच के लिए अलग से कमरे की व्यवस्था करनी होगी। सरकार का मानना है कि इससे पीड़िता की मानसिक पीड़ा बढ़ने पर रोक लगेगी। डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ रिसर्च ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के साथ मिलकर विशेषज्ञों की मदद से नई नियमावली बनाई है। ये नियम उन सभी को उपलब्ध कराए जाएंगे, जो यौन हिंसा पीड़ितों की जांच करते हैं।

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