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और ऑस्कर जाता है..

शायद ही इस तथ्य पर किसी को आपत्ति हो कि 12 ईयर्स ए स्लेव फिल्म को बेस्ट पिक्चर का एकेडमी अवॉर्ड दिया गया है। यह सच्ची कहानी पर आधारित फिल्म है, जिसमें दिखाया गया है कि एक अश्वेत आदमी को 1840 के दशक में गुलामी के लिए बेच दिया गया था। इस फिल्म को जबर्दस्त वाहवाही मिली है और इसके अभिनेता, निर्देशक और लेखक को आलोचकों ने खूब सराहा है (ये तीनों ऑस्कर की दौड़ में शामिल भी थे)। शो के शुरू में मेजबान एलेन डीजेनेरस ने मजाक में कहा कि एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स ऐंड साइंस के वोटर के पास दो ही विकल्प हैं: या तो वे अपना सर्वोच्च सम्मान 12 ईयर्स ए स्लेव के प्रति प्रकट करें या ‘रेसिस्ट’ कहलाएं। यह फिल्म अमेरिकी इतिहास के सबसे त्रासद काल का क्रूर चित्रण है। हालांकि, उल्लेखनीय यह है कि बोल्ड विषय के बावजूद फिल्म 22 मिलियन डॉलर में बनकर टिकट खिड़की तक पहुंच गई और सिर्फ उत्तरी अमेरिकी में इसकी कमाई 50 मिलियन डॉलर को पार कर गई।

यही नहीं, विदेशों में इस फिल्म को 90 मिलियन डॉलर का फायदा हुआ। अब जब इसे ‘ऑस्कर विनर फिल्म’ के रूप में प्रचारित किया जाएगा, तो निश्चित रूप से इसकी कमाई और बढ़ेगी। जो इसे बड़े परदे पर नहीं देख पाएं, वे छोटे परदे पर देखेंगे। इसमें कोई दोराय नहीं कि हाल के वर्षों में यह धारणा बनी है कि बड़ी हॉलीवुड स्टूडियो जोखिम नहीं लेना चाहतीं। वे कम बजट की गंभीर या विवादास्पद फिल्में नहीं बनातीं, जबकि 15-20 साल पहले ऐसी फिल्में अपेक्षाकृत अधिक बनती थीं। इस मामले में 12 ईयर्स ए स्लेव  एक मिसाल की तरह है, जो बड़ी हॉलीवुड स्टूडियो को बताती है कि कठिन विषयों पर भी अच्छी और कमाऊ फिल्में बनाई जा सकती हैं। इससे भी बड़ी बात यह है कि इस फिल्म ने हमारी सिनेमा-संस्कृति को समृद्ध किया है। इतिहास के प्रति जो हमारी समझ है, उसे और गहराई मिली है और मैकक्वीन पहले अश्वेत निर्माता हैं, जिन्हें यह सम्मान मिला है। साथ ही, यह देखना सुखद रहा कि 12 ईयर्स ए स्लेव  जैसी फिल्मों के दर्शक आज भी मौजूद हैं।
द लॉस ऐंजिलिस टाइम्स, अमेरिका

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