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सुब्रत रॉय अभी हिरासत में ही रहेंगे: सुप्रीम कोर्ट

सुब्रत रॉय अभी हिरासत में ही रहेंगे: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय को एक सप्ताह तक दिल्ली में ही हिरासत में रखने का मंगलवार को आदेश दिया। न्यायालय ने सहारा समूह द्वारा निवेशकों को धन लौटाने के प्रस्ताव पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुये कहा कि उसने कोई ठोस प्रस्ताव पेश नहीं किया है।

रॉय को तिहाड़ जेल में रहना होगा, जहां उन्हें कोई विशेष सुविधा नहीं दी जाएगी। उन्हें जेल का ही खाना खाना होगा और जेल के बिस्तर पर ही सोना होगा। न्यायमूर्ति केएस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ की खंडपीठ ने सुब्रत रॉय के साथ ही सहारा समूह के दो अन्य निदेशकों रवि शंकर दुबे और अशोक रॉय को भी हिरासत में लेने का आदेश दिया, जबकि महिला निदेशक वंदना भार्गव को स्वतंत छोड़ दिया।

सफेद शर्ट के ऊपर जैकेट और सहारा के लोगो वाली काली टाई पहने सुब्रत रॉय को अपराह्न दो बजे शीर्ष अदालत में पेश किया गया, लेकिन इससे पहले न्यायालय परिसर में भारी अफरा-तफरी के बीच खुद को वकील बताने वाले एक व्यक्ति ने सहारा प्रमुख के चेहरे पर काली स्याही फेंक दी।

न्यायाधीशों ने कहा कि हम प्रस्ताव से खुश नहीं हैं। कोई ठोस प्रस्ताव अभी तक नहीं आया है। हम इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। कोई बैंक गारंटी नहीं है। वंदना भार्गव के अलावा सभी दिल्ली में हिरासत में रहेंगे। न्यायालय ने साथ ही स्पष्ट किया कि यह अवमानना मामले में आदेश नहीं है।

इस मामले की सुनवाई के दौरान रॉय के दोनों पुत्र सुशांतो रॉय और सीमांतो रॉय भी न्यायालय में मौजूद थे। हिरासत से बचने के लिये जब रॉय ने अंतिम प्रयास किया, तो न्यायाधीशों ने कहा कि हम ठोस प्रस्ताव चाहते हैं। आप आज दीजिये या कल दीजिये। इसके साथ ही न्यायालय ने कहा कि अब उनके मामले में 11 मार्च को सुनवाई की जायेगी।

इससे पहले, मामले की सुनवाई शुरू होते ही रॉय ने न्यायालय के आदेश का पालन नहीं करने के लिये माफी मांगी ओर यह भरोसा दिलाया कि उसके आदेशों पर वह अमल करेंगे। उन्होंने निवेशकों का धन लौटाने के लिये कुछ और समय देने का भी अनुरोध किया। रॉय ने कहा कि मुझे आप में भरोसा है। यदि मैं आपके आदेश का पालन नहीं करूं, तो मुझे सजा दीजिये।

रॉय ने और समय का अनुरोध करते हुये कहा कि निवेशकों का धन लौटाने के लिये समूह अपनी संपत्तियों को बेचेगा। न्यायाधीशों ने रॉय से कहा कि आप नकद में भुगतान नहीं कर सकते हैं, क्योंकि यह कानून के खिलाफ है। आपको डिमान्ड ड्रॉफ्ट या चेक से ही भुगतान करना होगा।

न्यायालय ने सहारा समूह को न्यायिक आदेशों का पालन नहीं करने और निवेशकों का धन लौटाने के मामले में परस्पर विरोधी दृष्टिकोण अपनाने के लिये भी सहारा समूह को आड़े हाथ लिया। न्यायाधीशों ने कहा कि आपने हमें मजबूर किया। यदि आप गंभीर होते तो यह नौबत नहीं आती।

न्यायालय ने रॉय और दो निदेशकों को हिरासत में लेने का निर्देश देते हुये कहा कि वह तो अपने आदेश पर अमल कर रहा है। इससे पहले, दिन में रॉय उत्तर प्रदेश पुलिस की गाड़ियों के काफिले में से एक कार से बाहर निकलते ही मनोज शर्मा नाम के एक व्यक्ति ने उनके चेहरे पर बोतल से स्याही फेंक दी ओर फिर चिल्लाने लगा सहारा चोर है।

इस व्यक्ति की वहां एकत्र वकीलों और दूसरे लोगों ने पिटाई की। बाद में उसे पुलिस तिलक मार्ग थाने ले गयी। मनोज शर्मा के बारे में कहते हैं कि पहले भी उसने कांग्रेस सांसद सुरेश कलमाड़ी को अदालत में पेश किये जाते वक्त उन पर जूता फेंका था। शर्मा ने स्याही फेंकने के बाद अपनी शर्त उतारी और चिल्लाने लगा, वह (रॉय) चोर है। उसने लोगों का धन चुराया है और मैं चोरों के खिलाफ हूं।

सुब्रत रॉय 28 फरवरी से उत्तर प्रदेश पुलिस की हिरासत में थे। प्रदेश पुलिस के सुरक्षाकर्मियों ने अपने और सहारा प्रमुख के लिये प्रवेश पास हासिल किये, ताकि दो बजे उन्हें न्यायालय में पेश किया जा सके। इससे पहले, न्यायालय ने रॉय की अनुपस्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुये उनकी गिरफ्तारी के लिये गैर जमानती वारंट जारी करते हुये उन्हें आज दो बजे पेश करने का आदेश दिया था।

इसके बाद रॉय ने गैर जमानती वारंट वापस कराने का असफल प्रयास, लेकिन न्यायालय ने उनका अनुरोध ठुकरा दिया था। न्यायालय ने सहारा समूह की दो कंपनियों द्वारा निवेशकों का 20 हजार करोड़ रुपये लौटाने में विफल रहने के मामले को लेकर शुरू की गयी अवमानना की कार्यवाही में रॉय के पेश नहीं होने के कारण उनकी गिरफ्तारी का आदेश दिया था।

सुब्रत रॉय ने अपनी 92 वर्षीय मां के खराब स्वास्थ्य के आधार पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने छूट देने का अनुरोध किया था, लेकिन न्यायालय ने इसे अस्वीकार कर दिया था। सहारा प्रमुख ने अवमानना के मामले में पेश नहीं होने के लिये बिना शर्त माफी मांगते हुये 27 फरवरी को फिर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था और गैर जमानती वारंट वापस लेने का अनुरोध किया था, लेकिन न्यायालय ने इसे भी ठुकरा दिया था।

रॉय ने 28 फरवरी को लखनउ में समर्पण कर दिया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।  न्यायालय ने राय के साथ ही सहारा समूह के तीन निदेशकों को भी समन जारी किये थे। न्यायालय ने न्यायिक आदेश के बावजूद निवेशकों का धन नहीं लौटाने के लिये 20 फरवरी को सहारा समूह को आड़े हाथ लिया था और रॉय के साथ ही सहारा इंडिया रियल इस्टेट कार्प लि. और सहारा इंडिया हाउसिंग इन्वेस्टमेन्ट कार्प लि. के निदेशकों रवि शंकर दुबे, अशोक रॉय और वंदन भार्गव को समन जारी किये थे।

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