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मंगल के बाद भारत के निशाने पर सूर्य

मंगल के बाद भारत के निशाने पर सूर्य

मंगलयान के सफल प्रक्षेपण के बाद इसरो अब सूर्य मिशन की तैयारी में है। सूर्य के अध्ययन के लिए साल 2020 तक आदित्य-1 उपग्रह का प्रक्षेपण किया जाएगा। इस अभियान में लगभग 1 अरब 20 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस मिशन से सौर वलयो और सौर हवाओं के अध्ययन में मदद मिलेगी। अब तक सिर्फ अमेरिका, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और जापान ने ही सूर्य के अध्ययन के लिए स्पेसक्रॉफ्ट भेजे हैं। चंद्रयान-1 और मंगलयान की सफलता से उत्साहित इसरो के वैज्ञानिक ‘आदित्य मिशन’ की तैयारी में हैं। एक अरब 20 करोड़ की लागत वाला यह मिशन 2017 और 2020 के बीच में लॉन्च होगा।

क्या है आदित्य मिशन
आदित्य एक उपग्रह है, जो सोलर ‘कोरोनाग्राफ’ यंत्र के जरिए सूर्य के सबसे भारी भाग का अध्ययन करेगा। इससे कॉस्मिक किरणों, विकिरणों और एक  हजार किलोमीटर प्रति सेकेंड की गति से चलने वाली सौर हवाओं के अध्ययन में मदद मिलेगी।

इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि सौर वलय और हवाएं किस तरह से धरती पर इलेक्ट्रिक प्रणाली और संचार व्यवस्था पर असर डालती है। इस मिशन से सूर्य के कोरोना से धरती के भू चुंबकीय क्षेत्र में होने वाले बदलावों के बारे में भी अध्ययन किया जा सकेगा। इसके अलावा इससे मानव निर्मित उपग्रहों और अंतरिक्षयानों को बचाने के उपाय भी पता किए जा सकेंगे।

कैसे करेगा काम
अभी तक वैज्ञानिक सूर्य के सबसे भारी भाग कोरोना का अध्ययन केवल सूर्यग्रहण के समय ही कर पाते थे। पृथ्वी से कोरोना सिर्फ पूर्ण सूर्यग्रहण के दौरान ही दिखाई देता है। आदित्य-1 उपग्रह सूर्य कोरोना के अध्ययन के लिए कृत्रिम ग्रहण का उपयोग करेगा। यह नासा के 1995 में प्रक्षेपित ‘सोहो’ के बाद सूर्य के अध्ययन का सबसे उन्नत उपग्रह होगा। सूर्य के कोरोना का तापमान 10 लाख डिग्री है।

2015 तक चीन का तिआंगोंग-2
चंद्रयान-1 और मंगलयान की सफलता से उत्साहित इसरो के वैज्ञानिक ‘आदित्य मिशन’ की तैयारी में हैं। एक अरब 20 करोड़ की लागत वाला यह मिशन 2017 और 2020 के बीच में लॉन्च होगा।

क्या है आदित्य मिशन
आदित्य एक उपग्रह है, जो सोलर ‘कोरोनाग्राफ’ यंत्र के जरिए सूर्य के सबसे भारी भाग का अध्ययन करेगा। इससे कॉस्मिक किरणों, विकिरणों और एक  हजार किलोमीटर प्रति सेकेंड की गति से चलने वाली सौर हवाओं के अध्ययन में मदद मिलेगी।

इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि सौर वलय और हवाएं किस तरह से धरती पर इलेक्ट्रिक प्रणाली और संचार व्यवस्था पर असर डालती है। इस मिशन से सूर्य के कोरोना से धरती के भू चुंबकीय क्षेत्र में होने वाले बदलावों के बारे में भी अध्ययन किया जा सकेगा। इसके अलावा इससे मानव निर्मित उपग्रहों और अंतरिक्षयानों को बचाने के उपाय भी पता किए जा सकेंगे।

कैसे करेगा काम
अभी तक वैज्ञानिक सूर्य के सबसे भारी भाग कोरोना का अध्ययन केवल सूर्यग्रहण के समय ही कर पाते थे। पृथ्वी से कोरोना सिर्फ पूर्ण सूर्यग्रहण के दौरान ही दिखाई देता है। आदित्य-1 उपग्रह सूर्य कोरोना के अध्ययन के लिए कृत्रिम ग्रहण का उपयोग करेगा। यह नासा के 1995 में प्रक्षेपित ‘सोहो’ के बाद सूर्य के अध्ययन का सबसे उन्नत उपग्रह होगा। सूर्य के कोरोना का तापमान 10 लाख डिग्री है। 

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