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डीयू की तरह नर्सरी के लिए केंद्रीयकृत प्रणाली हो

नर्सरी दाखिला में हो रही मारामारी को देखते हुए हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय की तर्ज पर केंद्रीयकृत प्रणाली बनाने की संभावना तलाशने का सुझाव दिया है। हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों द्वारा बार-बार प्रबंधन कोटा समाप्त किए जाने को स्वायत्तता पर हमला बताए जाने के क्रम में यह सुझाव दिया है।

जस्टिस मनमोहन ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी कॉलेज निर्णय लेने के लिए स्वायत्त हैं। इसके बावजूद दाखिले के लिए केंद्रीयकृत प्रणाली बेहतर तरीके से काम कर रही है। हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों की ओर पेश हो रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एन. के. कौल को नर्सरी दाखिला के लिए केंद्रीयकृत प्रणाली बनाने की संभावना तलाशने को कहा है।

हाईकोर्ट ने यह सुझाव उपराज्यपाल डॉं. नजीब जंग द्वारा नर्सरी दाखिला के लिए जारी दिशा-निर्देश के खिलाफ निजी स्कूलों की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। इससे पहले, वरिष्ठ अधिवक्ता कौल ने हाईकोर्ट से सरकार द्वारा प्रबंधन कोटा समाप्त किए जाने को निजी स्कूलों के स्वायत्ता पर हमला बताते हुए दाखिले के लिए जारी दिशा-निर्देश को रद्द करने की मांग की।

इस बीच, केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर दिल्ली सरकार के दिशा-निर्देश का समर्थन किया है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अवर सचिव ज्याति पहवा ने कहा है कि डॉ. जंग द्वारा नर्सरी दाखिला के लिए जारी दिशा-निर्देश शिक्षा के अधिकार कानून के अनुरूप है।

स्थानांतरण श्रेणी के अंक रद्द करने को चुनौती
नर्सरी दाखिले का मामला एक बार फिर से कानूनी पेचीदगी में उलझता दिख रहा है। उपराज्यपाल द्वारा नर्सरी कक्षा में दाखिले के लिए स्थानांतरण श्रेणी में 5 अंक देने के प्रावधान को रद्द किए जाने के खिलाफ अभिभावकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अभिभावकों ने हाईकोर्ट में उपराज्यपाल के निर्णय को रद्द करने की मांग की है। उपराज्यपाल ने 27 फरवरी को नर्सरी दाखिला के लिए स्थानांतरण श्रेणी में 5 अंक के प्रावधान को रद्द कर दिया था।

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