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डीआईओएस के बाद अब जेडी पर गिरी गाज

निदेशक हिन्दुस्तान संवाद अलीगढ़। बोर्ड परीक्षा केन्द्र निर्धारण में लेटलतीफी और केन्द्रों को बनाने में तमाम सवालों के घेरे में चल रहीं संयुक्त शिक्षा निदेशक पर शासन ने तलवार चला ही दी। उन्हें अलीगढ़ से हटाकर कानपुर में इसी पद पर भेज दिया गया है। सोमवार को इस संबंध में शासनादेश जेडी और डीएम के पास आ गया। अलीगढ़ मंडल की संयुक्त शिक्षा निदेशक अंजना गोयल यूपी बोर्ड परीक्षा को लेकर सवालों के घेरे में चल रही थीं।

दसिंबर तक बोर्ड की ओर से केन्द्रों की सूची मांगने के बाद भी केन्द्र निर्धारण में घोर लापरवाही की जाती रही। कई बार शासन की ओर से उनको केन्द्रों के निर्धारण में लेटलतीफी पर चेतावनी भी दी गई। लेकिन फिर भी ढीलाई और हीलाहवाली के बीच जनवरी के मध्य तक केन्द्रों की सूची बोर्ड भेजी गई। नतीजा यह रहा कि बोर्ड की ओर से सारे काम लेट हो गए। हालात ऐसे हुए कि परीक्षा शुरू होने तक भी अव्यवस्थाएं हावी रहीं।

पहले शासनादेश का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों को केन्द्र बना दिए गए। कई ऐसे स्कूलों को केन्द्र बना दिया गया, जिनमें न तो फर्नीचर की व्यवस्था है और न ही कमरे सही ढंग से बने हुए हैं। इतना ही नहीं जिले के 266 परीक्षा केन्द्रों में से नकल के लिए बदनाम अतरौली में ही 122 परीक्षा केन्द्र बना दिए गए। फिर प्रैक्टिकल से लेकर परीक्षा की अन्य तैयारियों में भी देरी होती रही। बोर्ड परीक्षा कार्यक्रम तय होने के बाद से ही शिक्षा विभाग के दोनों उच्चाधिकारी सवालों के घेरे पर रहे।

सबसे पहले शासन ने डीआईओएस प्रमोद कुमार पर गाज गिराते हुए बोर्ड से अटैच कर लिया। अब बारी आई संयुक्त शिक्षा निदेशक की और बोर्ड परीक्षा शुरू होते ही शासन ने उन पर भी गाज गिरा दी। उन्हें संयुक्त शिक्षा निदेशक के पद पर ही कानपुर भेज दिया गया है। इसके आदेश सोमवार को जेडी कार्यालय और डीएम कार्यालय को भेज दिया गया। उनके स्थान पर बरेली के जेडी महेन्द्र देव को अलीगढ़ का जेडी बनाया गया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि मंगलवार को जेडी अपना पद पद छोड़ दें और नए जेडी कार्यभार ग्रहण कर लें।

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