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एक साथ उठीं तीन अर्थियां, छाया मातम

पीलीभीत। फुफेरे भाई एसएसबी जवान मुकेश की शादी को लेकर शवि सिंह और श्रीकृष्ण के परिवार में खुशनुमा माहौल था। हर कोई शादी के जश्न में डूबा हुआ था। शादी में जमकर मौज-मस्ती करने के बाद कार में सवार सभी एक दूसरे से हंसी मजाक कर खुशी का इजहार कर रहे थे। किसे पता था कि यह हंसी चंद मिनटों में खामोशी का रूप ले लेगी। कार के नहर में गिरने के बाद झटका लगते ही सबके चेहरों पर खौफ छा गया।

मुश्किल घड़ी में एक दूसरे को बचाने के भरपूर प्रयास किए, पर कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। शवि सिंह, अरविंद और अशोक की सांसें थम गईं। पति और पुत्र की लाश देखकर नंदरानी पूरी तरह टूट गई। उधर अशोक की मां विद्यादेवी भी बेटे की मौत पर बिखर गई। दुख के क्षणों में पूरा गांव पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने में जुटा रहा। कोई कुदरत का कहर, तो कोई ईश्वर की मर्जी कहकर परिवार को सांत्वना दे रहा था।

सोमवार को एक साथ गांव में तीन अर्थियां उठीं, यह देख पूरे गांव में मातम छा गया। पिता शवि सिंह और भाई अरविंद को कमलेश ने मुखाग्नि दी। उधर जवान बेटे को मुखाग्नि देते वक्त अशोक के पिता श्रीकृष्ण का विलाप पत्थरों को भी रुला गया। होनहार छात्र थे अरविंद और अशोक दुखद हादसे मे जान गंवाने वाला अरविंद तीन भाइयों और पांच बहनों में सबसे छोटा था। वहीं अशोक अपने चार भाइयों में सबसे बड़ा था। शिक्षा के महत्व को समझते हुए पढ़ाई के प्रति दोनों की लगन देखते बनती थी।

अरविंद शहर के चिरौंजीलाल वीरेंद्रपाल इंटर कालेज में कक्षा सात में और अशोक उपाधि महाविद्यालय से बीए कर रहा था। समय मिलने पर दोनों गांव में शिक्षा की अलख जगाने की कोशशिों में जुटे रहते थे। गांव वालों को जागरूक करना और बच्चों को शिक्षा की सीख देना उनकी आदत में शुमार था। दुर्घटनास्थल पर लगा लोगों का तांतासोमवार को नहर में पड़ी कार देखने वालों की भीड़ घटनास्थल पर पूरे दिन जुटी रही। रास्ते से गुजरने वाला हर शख्स कार नहर में गिरने का कारण खोजने में जुटा रहा, तो कोई हादसे की भीषणता का अंदाजा लगाने में।

नहर के पास घास में रखे भीगे जूते, कपड़े और अन्य सामान देख लोग मरने वालों की उम्र का अंदाजा लगाने में जुटे रहे।

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